26-11 Mumbai Terror Attack: आतंकियों ने नहीं लीं नशीली दवाएं

विवेक अग्रवाल,

मुंबई, 31 दिसंबर 2008

लश्कर के जिन 10 आतंकियों ने मुंबई पर हमला किया था, उनके बारे में यह खबर बड़ी गर्म थी कि लगातार 60 घंटों तक लड़ाई करते रहने के पीछे असली ताकत जिस्मानी या दिमागी न होकर किसी न किसी दवा या नशे की होगी। इस बात से लेकिन अब परदा उठ गया है। पता चला है कि आतंकियों ने कोई दवा या नशा नहीं लिया था। यह बात साबित हुई है मारे गए नौ आतंकियों की फोरेंसिक रिपोर्ट याने कि पोस्टमार्टम रपट से।

इन आतंकियों के शवों से कुछ अवशेष निकाल कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजे गए थे। वहां से जो जानकारियां मिलीं, उनकी रिपोर्ट अपराध शाखा को मिल गई। इस रिपोर्ट में साफ कहा है कि किसी तरह का नशीला पदार्थ या दवा इन आतंकियों ने हमले के तीन दिनों में नहीं खाई थी।

इधर इन आतंकियों की फोरेंसिक रिपोर्ट मिली है, इधर सरकार को मजबूरन इन आतंकियों के शवों को सुरक्षित रखना पड़ रहा है। इसके लिए खास किस्म के स्टील के कंटेनर ऑर्डर किए गए हैं। हर कंटेनर की कीमत 1.4 लाख रुपए है। मारे गए सभी आतंकियों के शवों को कम से कम 6 माह तक संभाल कर रखने पर सरकार को तकरीबन 12.75 लाख रुपए का खर्च बैठ रहा है। और तो और ये रकम महाराष्ट्र के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को खर्च करनी पड़ रही है।

बता दें कि देश भर से मुस्लिम समुदाय ने अपने-अपने कब्रिस्तानों में आतंकियों को दफनाने से साफ इंकार कर दिया था। उसके बाद सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया कि आतंकियों की लाशें कहां रखी जाएं।

(यह खबर सबसे पहले इंडिया टीवी में प्रकाशित / प्रसारित हुई।)

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