आतंकी गिरोह आईएस से निपटने में पुतिन और ओबामा साथ, मतभेद बरकरार

न्यूयॉर्क 29 सितंबर 2015।

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और रूसी राष्ट्रपति पुतिन सीरिया युद्ध का कूटनैतिक हल ढूंढने के लिए साथ आए हैं लेकिन सीरियाई राष्ट्रपति के सत्ता में बने रहने के प्रश्न पर दोनों में मतभेद अब भी बरकरार हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व के 100 अन्य नेताओं के साथ आतंकी गिरोह इस्लामिक स्टेट के खात्मे के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले अभियान पर चर्चा की। रूस पहले ही सीरिया में सेनाएं भेज चुका है।

 

सोमवार को यूएन महासभा को संबोधित करते हुए दोनों राष्ट्रपतियों ने सीरिया की स्थिति पर काफी अलग मत रखे लेकिन ओबामा ने कहा कि वे चार साल से चले आ रहे सीरिया संकट को सुलझाने के लिए रूस और ईरान के साथ काम करने को तैयार हैं।

 

सीरिया में राष्ट्रपति असद की ओर से लड़ने के लिए सेनाएं और लड़ाकू विमान भेजने वाला रूस, अब इस लड़ाई में जिहादियों को हराने के लिए “महागठबंधन” बनाने के लिए समर्थन कर रहा है।

 

पुतिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस युद्ध में सीरियाई राष्ट्रपति असद की सेना को नजरअंदाज करना “बहुत बड़ी भूल” होगी।

 

एक साल पहले यूएन में हुए इसी आतंकरोधी सम्मेलन में ओबामा ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। तब उन्होंने आईएस को तबाह करने की प्रतिबद्धता और अभियान में अमेरिका के साथ जुड़ने के लिए सभी देशों का आह्वान किया था। तबसे आईएस आतंकियों ने सीरिया और इराक के कई इलाकों में कब्जा जमा लिया है और लीबिया, यमन एवं मध्यपूर्व के कई देशों में पैठ बनाई है।

 

रूस द्वारा सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को मदद पहुंचाने पर अमेरिका ने गहरी चिंता जताई है। अमेरिका यूक्रेन मसले को भूल कर आगे बढ़ना नहीं चाहता।

 

इन दो प्रमुख देशों के अलावा सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट से लड़ने में ईरान भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ईरान ने अपने सेना सलाहकारों, हथियारों और प्रशिक्षकों को लगाया है।

 

यूएन महासभा के सामने ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी ने सबको मिल कर एक “संयुक्त मोर्चा” बनाने की बात कही, साथ ही रूस से श्री असद को साथ लेकर चलने के मत का समर्थन भी किया।

 

अमेरिका की अगुआई में करीब 60 देश आईएस के खिलाफ लड़ रहे हैं। यह गठबंधन अब तक सीरिया और इराक में आईएस के ठिकानों पर 5,000 से भी अधिक हवाई हमले कर चुका है। फ्रांस इसी हफ्ते इस अभियान में शामिल हुआ है। इसके अलावा अमेरिका का पेंटागन सीरिया में 50 करोड़ डॉलर के खास बजट से “नरमपंथी” सीरियाई विद्रोहियों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम भी चला रहा है।

 

अमेरिका ने इस पर जोर दिया है कि असद का सत्ता छोड़ना इस संकट को सुलझाने की तरफ पहला कदम होना चाहिए। वहीं लंबे समय तक यह मत रखने वाले कई यूरोपीय देशों ने हाल के दिनों में इस शर्त पर अपना रुख नरम किया है।

Courtesy: Attack News, Ujjain

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