सलमान सुपारीवाला से मिले नकली नोटों का राज क्या है?

  • पहली बार मुंबई में हुए नकली नोट बरामद
  • मुंबई में 500 व 2000 रु. के नकली नोट बरामद
  • अवैध इमारत निर्माता परिवार का सदस्य है आरोपी
  • पुलिस छुपा रही है नकली नोटों की असलियत?

विवेक अग्रवाल

मुंबई, 13 मार्च 2017।

मुंबई पुलिस ने सलमान सुपारीवाला उर्फ सेमी को नए 500 और 2000 करंसी नोट की नकल के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि उसने नशा खरीदने के लिए ये नकली नोट अपने गोदाम में कंप्यूटर और प्रिंटर की मदद से असली नोट स्कैन करके छापे थे। इन नकली नोट के जरिए वह खुद के लिए नशा खरीदता था।

 

डोंगरी पुलिस का दावा है कि नकली करंसी नोट छपाई का भंडाफोड़ तब हुआ जब सलमान के एक दोस्त को पुलिस ने नाकाबंदी में गिरफ्तार किया, जब वह ये नकली नोट लेकर नशा खरीदने जा रहा था। सलमान की उम्र 28 साल है। उसे डंकन रोड से तब गिरफ्तार किया, जब उसके साथी वकार अंसारी (21) को 4 मार्च 2017 ने गिरफ्तार होने के बाद सलमान के बारे में बताया था कि यह करंसी वह अपने गोदाम में छापता है।

 

वकार को डोंगरी पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान तब गिरफ्तार किया था, जब वह अपनी मोटरसाईकिल पर जा रहा था। उसने नाकाबंदी देखते ही मुड़ कर जाने की कोशिश की तो शक के आधार पर रोक कर तलाशी लेने पर नकली करंसी मिली थी। इस मामले में पुलिस दो युवकों की तलाश कर रही है।

 

नशे के लिए छापे नोट

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उससे 2000 के 21 और 500 के 11 नकली नोट मिले, जिनकी कीमत 47,500 रुपए होती है। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि वकार दक्षिण मुंबई के ही एक कॉलेज से स्नातक कर चुका है। वह पहले कॉल सेंटर में काम करता था। उसकी वहां से नौकरी छूट गई और कहीं काम नहीं मिला। वह कई किस्म के नशे की लत पाल चुका था। सलमान से उसकी मुलाकात एक नशा विक्रेता के पास जाने पर हुई थी। इसके बाद दोनों एक साथ नशा करने लगे थे।

 

आला दर्जे का कागज लाया सलमान

सलमान का परिवार दक्षिण मुंबई में इमारत निर्माण कारोबार में लगा है। वे आग्रीपाड़ा की एक इमारत में रहते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सलमान ने बयान दिया है कि उसे नशे के लिए मनचाही रकम नहीं मिलती थी, इसलिए नकली करंसी छापने लगा था। उसने बोर्ड कागज खरीद लिया था और उन पर नकली करंसी छापता था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसके दफ्तर से बरामद नकली करंसी भी उसी बेहतरीन कागज पर छपी है।

सलमान कैसे पकड़ा गया

जब वकार से पुलिस अधिकारियों को पता चला कि सलमान छुट्टी मनाने के लिए अमरीका गया है और 9 मार्च तक लौटेगा, तो उन्होंने इस मामले में खासी गोपनीयता बरती। सलमान को वकार की गिरफ्तारी की हवा भी नहीं लगने दी। उसकी वापसी तक वे बड़ी खामोशी से चारों तरफ निगाहबीनी करते और जाल बिछा कर बैठे रहे। जब वह लौटा तो डंकन रोड स्थित घर से धर दबोचा। उसके बाद बाबुलनाथ मंदिर के सामने बने उसके दफ्तर पर भी छापा मारा।

 

डोंगरी के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर नितीन बांगले के मुताबिक यहां से तीन कंप्यूटर, प्रिंटर, सादे कागज, छपी नकली मुद्रा बरामद हुए। सलमान का कहना है कि वकार को यह रकम नशा खरीदने के लिए ही दी थी।

 

पुलिस ने सलामन के खिलाफ आईपीसी की धारा 489 (ए), 489 (बी), 489 (सी) और 34 के तहत नकली करंसी छापने, इस्तेमाल करने और रखने तथा साजिश करने के मामले में गिरफ्तार किया है। अदालत में पेश किया तो 15 मार्च 2017 तक पुलिस हिरासत में रखने के आदेश जारी हो गए। इस मामले में सलमान के दो और साथियों की तलाश हो रही है।

 

रसूखदार परिवार से है सलमान

सलमान सुपारीवाला का परिवार दक्षिण मुंबई इलाके में बड़ा रसूख रखता है। उसके पिता का नाम बाबा सुपारीवाला है, जिनके दो भाई परवेज और अब्दुल गफ्फार सुपारीवाला है। सलान के दो भाई फराद और फीजान हैं। फराद की शादी मुंबई के एक बड़े राजनीतिक के घर हुई है। वह बाबा सुपारीवाला का बड़ा बेटा है। उसका नाम अवैध इमारतें तामीर करने वालों को रकम मुहैय्या करवाने वालों में शूमार होता है।

मुखबिरों के मुताबिक इस परिवार ने इलाके में 100 से अधिक इमारतें तामीर की हैं, जिनमें से कई अवैध बताई जाती है।

 

परवेज को इलाके में पुलिस और राजनेताओं के सेटर के रूप में पहचाना जाता है। कहते हैं कि परवेज के इलाके के तमाम रसूखदारों से बड़े गहन संबंध हैं। इनके बूते वह कुछ भी करवाने में सक्षम होता है। वह डी-कंपनी के एक सिपहसालार सलीम फ्रूट से भी जुड़ा बताते हैं। अवैध इमारतें तामीर करने वालों को वह भी आर्थिक मदद देता बताते हैं।

 

बमकांड आरोपी से संबंध!

1993 बमकांड के फरार आरोपी सलीम तलवार से भी इस परिवार के संबंध बताए जाते हैं। यह कहा जाता है कि उसकी तमाम अवैध संपत्तियां इसी परिवार ने खरीदी थी। अल-फराज नामक एक गेस्ट हाऊस की मिल्कियत भी सलीम की थी, जिसे इस परिवार ने खऱीद कर नया नाम दे दिया है – सुपारीवाला बिल्डिंग। सलमान की पुरानी इमारत तत्कालीन मनपा उपायुक्त (अतिक्रमण विरोधी) जीआर कैरनार ने पूरी तरह तोड़ दिया था। उसके बाद वहां सुपारीवाला हॉल बना था।

बाबा के संबंध आलमजेब पठान के भाई याकूब व शहजाता पठान से भी बताए जाते हैं। ये लोग गुटके की अवैध तस्करी में लिप्त हैं। दुबई से तंबाकू वाले माणिकचंद गुटके की तस्करी होती है। यह आलमजेब वही है, जिसकी दाऊद और साबिर इब्राहिम से दुश्मनी के चलते हत्या हो गई थी।

 

कितने और कैसे नोट?

पुलिस का दावा है कि 47,500 रुपए की नकली करंसी बरामद हुई है। इसके उलट इलाके में यह अफवाह पसरी हुई है कि इनसे 47 लाख रुपए की नकली नकदी मिली है।

 

कुछ का कहना है कि कुल 5 करोड़ की नकदी मिली है। इलाके में कुछ लोग यह शंका भी कर रहे हैं कि नकली नोट मुंबई में छपे ना होकर पाकिस्तान से आए भी हो सकते हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच भी होनी चाहिए।

 

सलमान के परिवार की पृष्ठभूमि और संबंधों के चलते इस मामले में लोग शंका अधिक कर रहे हैं। यह अलग है कि इसके बारे में किसी के पास कोई सबूतन हीं हैं, वे बस आशंका ही जाहिर कर रहे हैं।

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Matt Kalil Jersey 
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