‘अदृश्य’ फिल्म का साहित्य रूप में आना, “अब नई गीता लिखें, जो कहे कि कहानी अमर होती है”

विशेष संवाददाता

मुंबई, 29 जुलाई 2018।

महानगर में आज साहित्य व फिल्मोद्योग में अनूठा प्रयोग पूर्ण हुआ, जिसका नाम है, अदृश्य। पहले एक फिल्म तैयार हुई, फिर उस पर उपन्यास की रचना हुई। इस उपन्यास का विमोचन आज गोरेगांव पूर्व के अजंता पार्टी हॉल में साहित्यकारों और फिल्मकारों के बीच हुआ।

 

‘अदृश्य’ फिल्म के पटकथा-संवाद लेखक विवेक अग्रवाल एवं अलका अग्रवाल सिग्तिया हैं, जिन्होंने इस उपन्यास की रचना की है। एक निराले विषय पर संदीप चटर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म अदृश्य को उपन्यास में बदला है। अब तक साहित्यिक कृतियों से फिल्में बनी हैं, पहली बार एक फिल्म ने उपन्यास का रूप धरा है।

 

उपन्यास के सह-लेखक विवेक अग्रवाल ने इस मौके पर कहा, “यह उपन्यास लिखना हमारे लिए बड़ी चुनौती रही। फिल्म की पटकथा और संवादों को जस का तस रखने से उपन्यास की रवानी पर फर्क पड़ रहा था, जिसके चलते कुछ तकनीकी तौर पर परिवर्तन किए। इस कहानी में आज की एक समस्या पर गंभीर चिंतन है। इसे ‘हॉरर’ और ‘मिस्ट्री’ के साथ बिल्कुल नई पैकेजिंग में पेश किया है।”

 

उपन्यास की लेखिका अलका अग्रवाल सिग्तिया ने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी कथा का नायक ध्रुव जैसे माता-पिता का प्यार और अपनत्व पाने के लिए तरसता है, वही हाल आज पूरी दुनिया में परिवारों और बच्चों का है। फिल्म को साहित्यिक रूप देने का अनूठा और ऐतिहासिक प्रयोग तो हम कर गुजरे हैं। फिल्म निर्देशक संदीप चटर्जी फिल्म में परिवार और पात्रों की जीवंत भावनाएं उभारना चाहते थे, जिसे हमने पाया कि यह तो एक कहानी या उपन्यास का मटीरियल है, सो इस रूप में तब्दील कर दिया। हम बृजमोहन अग्रवाल  के बेहद आभारी हैं, जो ऐसी शख्शियत हैं, जिनके साथ बिना रचनात्मक कार्य बड़ी चुनौती हो जाती।”

 

फिल्म के निर्देशक संदीप चटर्जी ने इस मौके पर कहा, मैं नया निर्देशक हूं तो बड़े बजट की फिल्म बनाना मेरे लिए संभव न था। मैंने तय किया कि ऐसी फिल्म बनाऊंगा जिसमें कहानी सब कुछ हो। वही कहानी अदृश्य में है। अलका अग्रवाल सिग्तिया और विवेक अग्रवाल ने जितने अच्छे संवाद लिखे उसे उतने ही अच्छे तरीके से उपन्यास में भी बदला है। यह सबके लिए बिल्कुल नई बात है।”

 

पुस्तक की समीक्षा करते हुए मशहूर लेखक-पत्रकार हरी मृदुल ने कहा किताब के पहले पृष्ठ का पहला पैराग्राफ पढ़ते ही यह समझ आ गया कि यह कितनी साहित्यिक है औऱ इसमें हमें आगे कितना अच्छा साहित्य पढ़ने के लिए मिलेगा। यह नई विधा है और अपने आप में अनूठा प्रयोग है।

 

लोकार्पण में विशिष्ट अतिथी बनारस घराने की शास्त्रीय गायिका पद्मश्री सोमा घोष ने किताब में लिखी एक नज्म गाने के साथ ही कहा कि ऐसे अनूठे प्रयोग और कहानी के साथ ही जब नज्म की बारी आई और गुनगुनाई तो मुझे मन से कहता हूं कि बहुत अच्छा लगा।

रचनाकार सूर्यबाला ने कहा कि ये ऐसा पहला प्रयोग है, जिसके कारण अब किताब और फिल्म की तुलना होगी। ऐसे प्रयोग अब और होने चाहिए।

 

पटकथा लेखक कमलेश पांडे ने कहा कि मैंने इतनी फिल्में लिखीं लेकिन आज तक उन पर कोई उपन्यास नहीं लिख पाया। इस मामले में अलका-विवेक आगे निकल गए।

 

रंगकर्मी अतुल तिवारी ने कहा तीसरी गीता लिखी जानी चाहिए, जिसमें यह कहा जाए कि आत्मा तो भले ही अमर होती है लेकिन कहानी भी अमर होती है।

 

पटकथा लेखिका अचला नागर ने कहा कि कहानी में दम होना चाहिए। मैं साहित्य और फिल्म, दोनों ही क्षेत्रों से जुड़ी हूं। फिल्म की कहानी में दम लग रहा है, तभी यह उपन्यास में तब्दील हुआ है।

 

समाजसेवी वीरेंद्र याज्ञनिक ने कहा कि यह अभिनव प्रयास है, और इससे जुड़ कर मैं बहुत खुश हूं। साहित्य में ऐसे प्रयोग होते रहेंगे तो हमारा हिंदी साहित्य समृद्ध होता ही रहेगा।

 

केके पब्लिकेशंस, दिल्ली के मालिक देविंदर कुमार ने कहा कि यह कहानी पढ़ कर ही मुझे इतनी अच्छी लगी कि हमने तय कर लिया कि यह किताब तो हम ही प्रकाशित करेंगे। यह बात और है कि इसकी पांडुलीपि हमें मात्र 17-18 दिन पहले ही मिली थी लेकिन यह कृति छोड़ नहीं सकते थे।

 

समाजसेवी और पत्रकार अभिजीत राणे ने कहा कि किताबें तो बहुत आती हैं लेकिन कुछ नया करने का साहस सभी में नहीं होता है। सच तो यह है कि इस तरह का साहस इन लेखकों के बूते का ही है कि फिल्म की स्क्रिप्ट को भी एक उपन्यास में बदल डालें।

 

विमोचन समारोह का संचालन देश के मशहूर पत्रकार-लेखक दीपक पचौरी ने करते हुए रेखांकित किया कि हैरी पॉटर के लेखन और फिल्मों के दीवाने कहां नहीं हैं लेकिन आज लग रहा है कि हमारे देश में भी वह दीवानगी पैदा करने वाला साहित्य और फिल्म रचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

 

फिल्म निर्माता सतीश पुजारी ने कहा कि हम इस बात से बड़े ही खुश हैं कि तीन अगस्त को रिलीज हो रही हमारी फिल्म पर एक साहित्यिक कृति आ रही है। फिल्म निर्माता दीपक शाह ने कहा कि इस किताब के आने से फिल्मी जगत भी समृद्ध होगा।

 

इस मौके पर विशेष उपस्थिति उमाकांत वाजपेई, खन्ना मुजफ्फरपुरी, दिप्ती मिश्र, कविता गुप्ता, दूरदर्शन से डॉ. शैलेष, पं. किरण मिश्र, आसकरण अटल, विनोद दुबे, इमरोज आलम, सौम्या दुआ, अश्विनी जोशी, अवनिंद्र आशुतोष के अलावा फिल्म व साहित्य जगत की कई जाने-मानी हस्तियों ने शिरकत की। फिल्म के सभी सितारे और गायक भी इस मौके पर विशेष रूप से आए और सभी ने पूरे आयोजन में शिरकत की।

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