गवली गिरोह का मुंबई रेसकोर्स में हफ्ताखोरी के लिए आतंक, दो दिनों से बुकियों की हड़ताल

विवेक अग्रवाल।

मुंबई, 05 अगस्त 2018।

  • गवली गिरोह मुंबई रेसकोर्स बुकियों से मांग रहा हफ्ता
  • बुकियों में पसर गया खासा आतंक
  • दोनों दिनों से बुकियों की हड़ताल
  • रिंग है दो दिनों से पूरी तरह बंद
  • एक बुकी का किया अपहरण
  • रेसकोर्स प्रबंधन ने नहीं किया मामला दर्ज

हत्याकांड में जेल की सलाखों के पीछे बंद गिरोह सरगना अरुण गवली उर्फ डैडी के कुछ गुंडे अचानक सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने न केवल मुंबई रेसकोर्स के अधिकृत बुकियों को हफ्ते के लिए धमकाया है बल्कि एक बुकी को दो हफ्ते पहले अपहृत करके 15 लाख रुपए की फिरौती वसूल भी की है। बुरी तरह डरे और परेशान बुकियों ने पिछले दो दिनों से कारोबार बंद कर हड़ताल कर दी है। इस हड़ताल के कारण बुकियों को हर दिन जहां लाखों का, वहीं रेसकोर्स को भी करोड़ों रुपए का घाटा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक आज रविवार को भी मुंबई के महालक्ष्मी स्थित रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब ( आरडब्ल्यूआईटीसी) का रिंग बंद है। आज दूसरा दिन है जब यह रिंग बंद हुआ है। इतिहास में यह पहला मौका है कि जब किसी गिरोह के डर से मुंबई रेसकोर्स का रिंग बंद हुआ है।

 

गुंडों की धमकी अजब-गजब

इन गुंडों ने करोड़ों रुपए का हफ्ता हर साल देने की शर्त रखी है। इन गुंडों ने यह भी धमकी दी है कि बुकियों और रेसकोर्स प्रबंधन के पीछे वे जीएसटी और आयकर अधिकारियों को लगा देंगे। सीबीआई में भी शिकायत करवाने की धमकी दी जा रही है।

इन गुंडों ने धमकाया है कि बुकी जीएसटी की चोरी कर रहे हैं, ये बात उच्चाधिकारियों को देने पर वे पीछे पड़ जाएंगे। इसके कारण उनका धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा। सब जेल जाएंगे सो अलग। इस धमकी के कारण भी तमाम बुकियों के चेहरों पर हवाईयां उड़ रही हैं।

 

कौन मांग रहा है हफ्ता

विश्वास – इस गुंडे ने कुछ दिनों पर हले एक कटर के साथ मारपीट की थी। वह लगातार रेसकोर्स में आकर बुकियों और कटर्स को धमका रहा है। खुलेआम धमकियां दे रहा है कि पुलिस या किसी भी गिरोहबाज को बुला लें, कोई इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अब वह अरुण गवली गिरोह के लिए काम कर रहा है।

सत्यम – पहले एक राजनीतिक दल से जुड़ा रहा यह गुंडा भी अब गवली गिरोह का सदस्य बन गया है।

विधायक – एक ताकतवर राजनीतिक दल का एक विधायक भी इस गिरोह के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। उसका भाई इन गुंडों के साथ रेसकोर्स में घुस कर धमकियां दे रहा है।

पार्षद – इलाके का ही एक ताकतवर राजनीतिक दल का पार्षद भी इस गिरोह का हिस्सा है। वह भी इन गुंडों को न केवल खुलेआम सहयोग दे रहा है बल्कि पंटरों तक को धमकियां दे रहा है।

विवेक पाटिल – यह भी इस गिरोह का सदस्य बन चुका है, जो रेसकोर्स बुकियों को धमका रहा है। यह भी पहले एक राजनीतिक दल का सदस्य रहा है।

उदय – इस गुंडे ने कुछ दिनों पहले ही रेसकोर्स में एक बुकी को सबके बीच बुरी तरह पीटा था। यह काम उदय ने सिर्फ हंगामा खड़ा करने और लोगों के बीच डर बैठाने के लिहाज से किया बताते हैं।

पुणे रेसकोर्स में घुड़दौड़ तस्वीर – पुणे रोसकोर्स से साभार

अर्थशास्त्र

रेसकोर्स में कुल 16 बुकी वैध रुप से घुड़दौड़ जुए का कारोबार संभालते हैं। हर बुकी के पास कम से कम सात कर्मचारी हैं। कुल मिला कर 112 लोग हर दिन रिंग में जाते हैं।

एक सूत्र के मुताबिक रेसकोर्स में एक बुकी को हर दिन छोटे से स्टॉल का 55 हजार रुपए किराया देना होता है। इस तरह हर माह एक बुकी से ही 16 लाख 50 हजार रुपए रेसकोर्स को महज किराए से ही कमाई होती है। यह रकम लगभग 2.65 करोड़ रुपए सालाना होती है।

इसके अलावा हर दिन मोबाईल फोन लेकर अंदर आने पर रेसकोर्स प्रबंधन हर व्यक्ति से 300 रुपए की वसूली करते हैं। हर दिन लगभग 30 मोबाईल लेकर बुकी और उनके आदमी रेसकोर्स में जाते हैं। इस तरह से प्रतिदिन 9 हजार रुपए की कमाई रेसकोर्स को होती है। साल की यह कमाई 32 लाख 85 हजार रुपए होती है।

हर दिन जो दांव घोड़ों की दौड़ पर लगते हैं, उसकी कमाई तो अलग ही है। बुकियों को हर दिन लगभग 1 लाख रुपए तक रोजनना खर्च आता है, जिसकी भरपाई उन्हें मिलने वाले कमीशन से होती है।

दो दिनों से रिंग बंद होने के कारण इस राजस्व का बड़ा हिस्सा रेसकोर्स को नहीं जा रहा है। यह मामला अब बेहद गर्म हो चला है।

इतना ही नहीं, एक तरफ जहां मुंबई रेसकोर्स पूरी तरह ठप्प पड़ा है, दूसरी तरफ पुणे और कोलकाता समेत देश के तमाम रेसकोर्स पूरी तरह चालू हैं और वहां कारोबार जोरों पर है।

 

बुकि का अपहरण

एक सूत्र का कहना है कि बुकि एसोसिएशन के अध्यक्ष का अपहरण भी पिछले दिनों रेसकोर्स के बाहर से ही हो गया था। उसने इन गुंडों को 15 लाख रुपए की फिरौती चुका कर अपनी रिहाई और सुरक्षा खरीदी थी। उसके बाद से ही यह बुकी डर के मारे रेसकोर्स नहीं आ रहा है।

 

पंटर एसोसिएशन बनी

पिछले दिनों कुछ लोगों ने मिल कर पंटरों के नाम पर एक एसोसिएशन बना ली है। कहा जा रहा है कि इस एसोसिएशन के जरिए भी आरडब्ल्यूआईटीसी पर दबाव डालने की योजना पर काम किया जा रहा है।

 

आरडब्ल्यूआईटीसी की खामोशी

इतना हंगामा होने के बावजूद पिछले दो सप्ताह से आरडब्ल्यूआईटीसी के पदाधिकारी बिल्कुल चुप बैठे हैं। उन्होंने न तो अभी तक पुलिस में कोई शिकायत दर्ज करवाई है, न ही उनकी तरफ से पुलिस बंदोबस्त हासिल करने के लिए प्रशासन या पुलिस से संपर्क किया है।

यह जानकारी सामने आई है कि कुछ बुकियों ने जब पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वे लिखित में नामों से साथ शिकायत दर्ज करवाएं। बुकियों और उनके कर्मचारियों में ऐसी दहशत पैठ गई है कि वे नामजद लिखित शिकायत दर्ज करवाने से हिचकिचा रहे हैं।

पता चला है कि आरडब्ल्यूआईटीसी के अध्यक्ष खुसरू धनजी भाई ने आज एक बैठक पुणे रेसकोर्स में अपने पदाधिकारियों और कुछ बड़े पंटरों के साथ बुलाई है। वहां आगे की योजना पर काम होगा।

सभी चित्र साभार – पुणे रोसकोर्स, आरडब्ल्यूआईटीसी पोर्टल)

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