तीन राज्यों में हारी भाजपा तो मध्यावधि चुनाव तय मान रहा है सट्टा बाजार

  • एक्जिट पोल्स के बाद तीन राज्यों के चुनावी सट्टे समीकरण बदले
  • राजस्थान में अभी भी बुकी जिता रहे इंका को
  • मध्यप्रदेश में बुकियों ने माना जीतेगी इंका पर कड़े मुकाबले में
  • छत्तीसगढ़ में भी हो गया भाजपा का भाव डांवाडोल
  • एक्जिट पोल के बाद छत्तीसगढ़ में भाजपा सके भाव बदले
  • 45 हजार करोड़ का सट्टा लगा चुका चुनाव पर
  • 10 दिसंबर की शाम से खाईवाली हो जाएगी बंद

 

विवेक अग्रवाल

मुंबई, 10 दिसंबर 2018।

2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर सट्टा बाजार में एक अलग ही हलचल दिखाई देने लगी है। यह कहा जाने लगा है कि यदि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को हार मिलती है तो वर्तमान सरकार एक बड़ा कदम उठा सकती है। यह संभावना है कि वर्तमान सरकार शीतकालीन सत्र में लोकसभा भंग कर दे और मध्यावधी चुनाव का बोझ वक्त के पहले ही भारत पर डाल दे।

 

चुनावी सट्टे के कारोबार का एक महत्वपूर्ण और मशहूर बुकी बताता है कि भाजपा की केंद्र में सरकार के लिए पांच राज्यों के चुनाव नाक का सवाल बन गए हैं। जनता में कई कारणों से रोष है। इसका प्रभाव आगामी लोकसभा चुनावों पर कम से कम पड़े, इसका ध्यान रखते हुए पहले ही चुनाव करवाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

 

मध्यावधी चुनाव के कारण क्या

बुकियों का कहना है कि कच्चे तेल के घटते भावों के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों के भाव लगातार बढ़ते चले जाने के कारण जनता में काफी आक्रोश बन चला था। अब चूंकी कच्चे तेल के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसका असर फिर से पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा। इसके चलते जनता में नाराजगी और बढ़ती जाएगी।

 

डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए को लेकर भी विपक्ष ने खासा बवल मचाया था। इसे लेकर भी अर्थशास्त्रियों से जनता के बीच तक हंगामा होता रहा है।

 

नोटबंदी के कारण जनता में से ही नाराजगी रही है। अब तो उद्योगपति, बैंकर और अर्थशास्त्री भी खुल कर  नोटबंदी के विरोध में बोलने लगे हैं।

 

राम मंदिर का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। संत समाज ने जिस तरह वर्तमान सरकार पर राम मंदिर पर दबाव बना लिया है, उसके कारण भी भाजपा के उच्चस्तरीय नेतृत्व में खासी परेशानी बन चली है।

 

आरएसएस से भी अब सीधी मांग आने लगी है कि राम मंदिर मुद्दे पर सरकार अध्यादेश लाए। भाजपा ने 2014 के आम चुनावों में वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो राम मंदिर बनेगा। इसी वादे की याद दिलाते हुए आरएसएस भी भाजपा सरकार पर हमलावर हो गया है।

 

लगातार हो रही भीड़ हत्याओं से भी भाजपा सरकार के लिए तकलीफ खड़ी हो गई है। गोकशी के नाम पर जो हिंसक अभियान दक्षिणपंथी संगठनों से छेड़ रखा है, उसे लेकर भाजपा की देश-विदेश में भारी किरकिरी हो रही है। एक बुकी का कहना है कि यदि 2019 के चुनावों से पहले ऐसी एक-दो और घटनाएं हो जाती हैं, उन्हें मीडिया में तूल दे गई, तो भाजपा के लिए आगमी चुनावों में समस्या होना तय है।

 

अंटी हुए 45 हजार करोड़

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से तीन पर खुले सट्टे ने बुकियों को अभी तक तो सुनहरा मौका ही दिया दिखता है। अब तक 45 हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा चुनावीस सट्टे में पार भी हो चुका है।

 

सटोरियों-बुकियों के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ राज्यों पर जो सट्टेबाजी का खेल जारी है, उसके इतर तेलंगाना और मिजोरम पर उनकी नजर तक नहीं है। सभी राज्यों में मतगणना का दिन 11 दिसंबर तय है।

 

बदली बोली बुकियों की

इंडिया क्राईम ने तीन राज्यों पर जारी सट्टे और सट्टाबाजार पर पुरी नजर बनाए रखी है। चुनाव के पहले जब भाव खुले थे, तबसे ही बुकियों का यही कहना रहा है कि राजस्थान में तो भाजपा का पत्ता पूरी तरफ साफ होना तय है। मध्यप्रदेश में तगड़ा मुकाबला होगा। छत्तीसगढ़ में फिर भाजपा सरकार बनाएगी, यही संकेत बुकी दे रहे थे।

 

अब बुकियों की बोली बदली हुई लग रही है। एक्जिट पोल के बाद बुकियों का कहना है कि छत्तीसगड़ में भी फोटो फिनिश याने कांटे की टक्कर वाले हालात बन चले हैं।

 

छत्तीसगढ़ में छाई मायूसी

सट्टाबाजार सूत्रों ने पहले यह दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में मतदान बाद भी रुख भाजपा और मुख्यमंत्री रमन सिंह के पक्ष में है। रमन सिंह को कोई चुनौती नहीं दे पाएगा। अब बुकियों के सुर बदले हुए लग रहे हैं।

 

सट्टा बाजार का कहना है कि रमन सिंह को सरकार बचाने में समस्या हो सकती है। यह बात और है कि मामला महज पांच सीटों से हार-जीत का ही होगा।

 

सट्टाबाजार के मुताबिक भाजपा के भावों में अब कुछ तब्दीली आई है। भाजपा को 45 सीटें मिलने का भाव 1.35 रुपए से बढ़ कर 2.80 रुपए हो गया, तो 50 सीटों के लिए 6.50 रुपए हो गया है, जो पहले मात्र 2.50 रुपे था। सीधे मुकाबले में खड़ी इंका का भाव सुधरा है। 45 और 50 सीटों पर पुराने भाव 2 और 5 रुपए से सुधर कर 2.25 और 4.50 रुपए हो गया है।

 

इसका मतलब यह है कि भाजपा के भाव खराब जरूर दिख दिख रही है, इसके बावजूद भाजपा और इंका के बीच कड़ी टक्कर होगी। जो दल जीतेगा, महज पांच सीटों के अंतर से ही खेल कर सकेगा।

 

छत्तीसगढ़ में सट्टे के भाव (10 दिसंबर 2018 को)

भाजपा इंका
सीट भाव सीट भाव
35 45 पैसे 35 28 पैसे
40 1.15 रुपए 40 80 पैसे
45 2.80 रुपए 45 2.25 रुपए
50 5.50 रुपए 50 4.50 रुपए

 

मध्यप्रदेश में भाजपा-इंका में कबड्डी

मध्यप्रदेश पर कब्जा करने के लिए इँका और भाजपा में कबड्डी चल रही है। दोनों पक्ष एक दूसरे को चित करने के लिए पूरा जोर लगाए रहे। अभी भी दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। इस जबरदस्त घमासान के बीच सट्टा बाजार ने कहा कि भावों में जो उतार-चढ़ाव हैं, उससे यह साफ हो रहा है कि मप्र में भाजपा सरकार मुश्किल में है।

 

सट्टाबाजार ने भाजपा को पहले अधिकतम 120 सीटें दी थीं, भाव 3.50 रुपए खोला था, इंका को इतनी ही सीटों पर 2.25 रुपए का भाल दिया था। इसमें भी परिवर्तन आया और दोनों दलों के लिए अधिकतम 110 सीटों पर के हिसाब से इंका हेतु 1.75 रुपए और भाजपा का 2 रुपए बताया था। भाजपा को नुकसान और इंका को फायदा दिख रहा था।

 

आज मिले भावों में सट्टाबाजार इंका को 110 सीटों तक जाता दिखा रहा है, जिसके लिए भाव 1 रुपए का है। इसके उलट भाजपा को अब 100 सीटों तक ही बुकियों ने समेट दिया है, जिसका भाव 1.15 रुपए बताया है।

 

एक बुकि के मुताबिक दोनों दलों में 10 सीटों के हेरफेर से ही सरकार बनाने का मामला बनेगा।

 

मध्यप्रदेश में सट्टे के भाव  (10 दिसंबर 2018 को)

कांग्रेस भाजपा
सीट भाव सीट भाव
95 22 पैसे 85 22 पैसे
100 42 पैसे 90 42 पैसे
105 67 पैसे 95 80 पैसे
110 1 रुपए 100 1.15 रुपए

 

राजस्थान में राख उड़ेगी

एक बुकी ने कहा कि इस बार तो राजस्थान में भाजपा सरकार की इज्जत राख होनी तय है। वैसे भी राजस्थान में जनता किसी को भी दुबारा नहीं चुनती है। इस साल भी हालात ठीक वही लग रहे हैं।

 

सट्टाबाजार ने पहले भाजपा को 75 सीटों के लिए 1.35 रुपए और इंका को अधिकतम 125 सीटों पर 1.80 रुपए का भाव दिय़ा था। वह बदल कर बदल कर भाजपा हेतु 60 सीटों पर 2 रुपए और इंका का 130 सीटों तक 1.70 रुपए हो गया था। इससे भाजपा कमजोर और इंका मजबूत दिख रही थी।

 

बता दें कि नवंबर में भाजपा को 60 से 75 सीटें सट्टाबाजार ने दी थीं, जो अब घट कर 45 से 65 सीटों तक आई हैं। इंका को तब 110 से 125 सीटों पर जीत का दावा सट्टाबाजार ने किया था, जो अब 100 से 1115 सीटों तक ही रह गया है। इस तरह देखा जाए तो भाजपा और इंका, दोनो ही दलों को सीटों का नुकसान और अन्य दलों व निर्दलियों को अधिक मौका मिलता दिख रहा है।

 

राजस्थान में सट्टे के भाव  (10 दिसंबर 2018 को)

कांग्रेस भाजपा
सीट भाव सीट भाव
100 22 पैसे 45 32 पैसे
105 42 पैसे 50 65 पैसे
110 80 पैसे 58 1 रुपए
115 1 रुपया 65 1.80 रुपए

 

कल्लू मामा का कमाल

बुकियों का कहना है कि यदि भाजपा किसी कारण से सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है, यदि मप्र में 125 सीटों से ऊपर चली गई तो यह ‘कल्लू मामा का कमाल’ होगा।

 

एक बुकी ने बताया कि पिछले दिनों जिस तरह शेयर बाजार के भाव गिरे हैं, वे कुछ उलटे ही संकेत दे रहे हैं। शेयर बाजार के खिलाड़ियों का मानना है कि चुनावों के बाद अप्रत्याशित नतीजे देखने के लिए मिल सकते हैं। यह क्यों और कैसे होगा, इसके बारे में कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है।

 

एक बुकी ने सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन मप्र और रास्थान में बढ़त मिलने पर ‘डिब्बे से जादुई जिन्न’ निकलने की बात कही। यह संकेत दिया कि वोटिंग मशीनों में कुछ गड़बड़ी हो सकती है। इस बुकी का कहना है कि इंका समेत सभी दल वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के लिए जो शोरशराबा मचाए हैं, उसके पीछे कोई कारण तो होगा ही।

 

मध्यप्रदेश में कमल फूलेगा!

एक बुकी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि मप्र में निर्दलियों और अन्य दलों को 8 से 10 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। 90 से अधिक सीटों पर भाजपा आई तो कमल में कमाल हो सकता है।

 

इन हालात में यह संभावना प्रबल है कि भाजपा इन निर्दलीय और अन्य दलों के सदस्यों को लेकर सरकार बनाने का दावा ठोंकेगी। उसे रोकने की स्थिति नहीं बन पाएगी।

 

फलौदी लोकल है’

राजस्थान के फलौदी इलाके में हर तीसरे घर और दुकान में सट्टे होने का मामला पिछले दिनों तूल पकड़ा था। इसे लेकर राजनीतिक दलों में भी काफी उत्सुकता देखी जा रही थी।

 

मुंबई के एक बड़े बुकी के मुताबिक फलौदी में भी जयपुर और इंदौर की तरह ही बरसों से सट्टेबाजी हो रही है। यहां के लिए कोई नई बात नहीं है।

 

इस बुकी ने दावा किया कि मुंबई से खुलने वाला सट्टा और भाव ही पूरे देश में ‘फॉलो’ किए जाते हैं। फलौदी भी उसमें से एक है। फलौदी के सट्टे को उसने लोकल सट्टा कहा। इसका कहना था कि फलौदी में स्थानीय स्तर पर भी कई किस्म के फैंसी भाव खोले जाते हैं। वे आपस में सट्टेबाजी करते रहते हैं। उनका सट्टा लाखों की सीमा पार नहीं कर पाता है, जबकि मुबंई के लगभग दो दर्जन बुकियों की तो 500 करोड़ रुपए से ऊपर की बुक चलती हैं।

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