महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के सट्टे में नालासोपारा सीट बनी बुकियों की आफत

  • नालासोपारा में उम्मीदवारों पर नहीं खुले भाव
  • सटोरियों की सांसत हो गया यह चुनाव क्षेत्र
  • एक तरफ खाई – दूसरी तरफ कुंआ जैसी हालत
  • पुर्व पुलिस अफसर बनाम बाहुबली नेता में फंसे बुकी

विवेक अग्रवाल

मुंबई, 10 अक्तूबर 2019

नालासोपारा पर इस बार सबकी निगाहें खास तौर पर टिकी हुई हैं। पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा और इलाके के कद्दावर नेता हितेंद्र ठाकुर के बेटे क्षितिज ठाकुर के बीच सीधा मुकाबला है। प्रदीप शर्मा ने पद से इस्तीफा देकर नालासोपारा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

नालासोपारा की सांसत

क्षितिज ठाकुर ने उन्हें पैराशूट केंडीडेट याने बाहरी उम्मीदवार करार दिया। उन्होंने कहा कि जो इलाके में रहता ही नहीं है, वह इलाके के लोगों का भला क्या करेगा। प्रदीप शर्मा ने जवाब में कहा कि यह आतंक के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने सीधे तौर पर भाई ठाकुर गिरोह के खिलाफ लड़ाई का ऐलान किया।

चोर कि पुलिस!

इसके कारण इलाके में प्रदीप शर्मा पर तंज कसने वाले पोस्टर लगे, जिनमें लिखा था – पुलिस की चोर।

कहा गया कि ये पोस्टर बाकायदा महानगरपालिका को लाईसेंस फीस देकर लगाए थे लेकिन भाजपा के दबाव में मनपा कर्मचारियों ने इन्हें निकाल दिया।

दो पाटों के बीच फंसे बुकि

नालासोपारा के कारण सटोरियों की जान सांसत में पड़ गई है। एक तरफ जहां प्रदीप शर्मा का गुट उन पर फेवरेट होने के भाव खोलने का दबाव डाल रहा बताते हैं, वहीं ठाकुर कंपनी से भी ऐसा ही दबाव बना हुआ है।

दोनों पक्षों से सटोरिए पंगा नहीं लेना चाहते हैं। उनके लिए आगे कुआं – पीछे खाई वाली हालत बन गई है। किसी एक पक्ष का साथ देने पर दूसरा उन पर बरस सकता है।

यही कारण कारण है कि सट्टेबाजों और बुकियों ने नालासोपारा पर भाव न खोलने की योजना बनाई है।

एक बुकि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस मगजमारी में पड़ने से अच्छा है कि हम नालासोपारा पर भाव ही नहीं खोलें। कौन जलता अंगारा हाथ में पकड़े।

प्रदीप शर्मा का संकट

पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना में प्रवेश के दौरान

प्रदीप शर्मा मुंबई के तेजतर्रार पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। उनके खाते में 100 से अधिक गिरोहबाजों और पुसारी हत्यारों की मुठभेड़ दर्ज हैं। लखन भैय्या की फर्जी मुठभेड़ मामले में वे गिरफ्तार हुए लेकिन अदालत से बरी हो गए।

ठाणे जिले में तैनाती के दौरान भी उनके द्वारा की गई कुछ गिरफ्तारियां खासी विवादित रही हैं, जिसमें से सट्टा बुकी सोनू जालान को मोका में गिरफ्तार करना भी रहा है। सोनू जालान ने मोका में गिरफ्तारी को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां अपराध शाखा के तत्कालीन प्रभारी इं. प्रदीप शर्मा को हार का मुंह देखना पड़ा था।

इसके बाद दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को जिस तरह मुंबई से बिना वारंट गिरफ्तार करके ले गए थे, उससे मुंबई पुलिस के आयुक्त खासे नाराज हुए थे। इं. प्रदीप शर्मा को उसके बाद मुंबई की हद में कोई भी गिरफ्तारी करने के पहले मुबंई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इजाजत लेने का फरमान जारी हो गया था।

एक नाकाम कोशिश

प्रदीप शर्मा ने पिछले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान भी विधायकी हासिल करने का एक दांव चला था।

कहा जाता है कि मुंबई के एक पूर्व आयुक्त ने भाजपा अध्यक्ष से प्रदीप शर्मा को मिलवाया था। उनके कहने पर ही अंधेरी से प्रदीप शर्मा को टिकट मिलना भी तय हो गया था। प्रदीप शर्मा की तस्वीरों वाले पोस्टर भी अंधेरी पूर्व के जेबी नगर इलाके के आसपास दिखने लगे थे। दो सप्ताह बाद ही अचानक ये पोस्टर गायब हो गए।

पता चला कि भाजपा ने उन्हें उस साल चुनाव में न उतरने की सलाह दी थी ताकी वे पद पर कुछ समय तक काम कर खुद पर लगे तमाम आरोपों की सपाई कर लें। उसके बाद चुनवी अखाड़े में उतरें।

इस्तीफा मंजूरी में पेंच

प्रदीप शर्मा का इस्तीफा तो महाराष्ट्र सरकार ने स्वीकार कर लिया लेकिन उसमें यह बात दर्ज है कि उनके खिलाफ चल रही जांच जारी रहेगी। महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रदीप शर्मा का इस्तीफा स्वीकार करने के पत्र की प्रति कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

दोनों पक्षों ने ताल ठोंकी

एक तरफ प्रदीप शर्मा के पक्ष में उत्तर भारतीय मतों का ध्रवीकरण होने की संभावना जताई जा ही है। कहा जा रहा है कि प्रदीप शर्मा को नालासोपारा और आसपास के इलाकों में रहने वाले तमाम उत्तर भारतीय मतदाताओं का फायदा मिल सकता है। वे खुद भी उत्तर भारतीय हैं, उनके लिए यह एक फायदे का गणित हो सकता है। प्रदीप शर्मा ने कहा कि वे इलाके में फैला आतंक खत्म करने के लिए यहां से चुनाव लड़ रहे हैं।

दूसरी तरफ क्षितिज ठाकुर ने भी रणभेरी बजा दी है। उन्होंने सबसे पहले तो प्रदीप शर्मा को बाहरी बता कर खारिज कर दिया। उसके बाद कहा कि मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई इलाकों के मुकाबले वसई-विरार-नालासोपारा इलाके में न केवल अपराध कम हैं बल्कि महिलाओं के साथ भी अपराध की संख्या काफी कम है। क्षितिज ठाकुर ने उन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन इलाकों में प्रदीप शर्मा काम कर चुके हैं, वहां तो पुलिस बल में रहते हुए अपराध रोक नहीं पाए, अब विधायक बन कर क्या अपराध रोक लेंगे।

माना जा रहा है कि क्षितिज ठाकुर को अपने गढ़ में जीत हासिल में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पूरा वसई-विरार-नालासोपारा इलाका हितेंद्र ठाकुर की पार्टी का गढ़ माना जाता है।

दोनों पक्षों के बीच लड़ाई बढ़ती जा रही है। मामला अब शर्मा बनाम ठाकुर हो गया है। दोनों पक्षों में घासा घमासान मचा हुआ है। यह मुकाबला दिलचस्प बन गया है।

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