किताब : आंसू: वासना का नरक भोगता बचपन

किताब : आंसू: वासना का नरक भोगता बचपन
लेखक – विवेक अग्रवाल
पृष्ठ – 195 / अध्याय – 24

बाल यौन उत्पीड़न आंसू का विषय है।

आंसू दरअसल बाल यौन अत्याचार से छलनी जिस्म में बसी बेबस रूह का रुदन है।

वासना के भूखे भेड़ियों का झुंड लगातार लपलपाती जीभें और आंखों में हवस भरे चारों तरफ घूमते हैं, उनके बीच लड़का हो या लड़की, जो फंस गया, उसका जिस्म और रूह, दोनों छलनी होना तय हैं।

आंसू का मुख्य किरदार रामू वही अभागी आत्मा है, जो इन भूखे भेड़ियों के बीच फंस गया, अब उसका क्रंदन सुनने वाला कोई नहीं। उसका बचपन हर पल एक नरक जीता है, जहां कभी प्रेम की शीतल बयार आई तो वह भी लाल लपट में तब्दील हो जाती है।

रामू पर आपराधिक यौन अत्याचार होते हैं। 5 से 25 की उम्र तक भयानक त्रासदी और संघर्ष झेलता अंततः काल कवलित होता है। वह आपकी चेतना और मर्म को झकझोरता है। आपके अंतस में टीस भरता है।

हींजड़ों, ग्रामीण राजनीति, यौन आकांक्षाओं की अनजानी दुनिया में झांकने का मौका भी यह किताब देती है।

द इंडिया इंक से प्रकाशित।

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