एनकाऊंटर का गेम

असलम को टेंशन मे देख के मैं बोला, “बंटा आज पूरा मुलुक जशन मनारेला है, और तू टेंशन मे चलरेला है?”

असलम हौले से मुस्कुराया और बोला, “बंटा, अपुन एक फिल्म मे डॉयलॉग सुना था, जो दिखता ऐ, वो होता नईं, और जो होता ऐ, वो दिखता नईं।”

“बंटा अब मैं तेरे कूं एक फिलिम का स्टोरी सुनाता, चार क्रिमिनल जेल मे बंद, बाहर पब्लिक चिल्लारेली, मारो… मारो… फांसी दो… फांसी दो… अपना शाना मामू ने प्लान किया… चारों में से एक मुर्गे को ताड़ा, कोपचे में ले के मुगली घुट्टी पिलाया, बोला तू बड़ा भोला है, गलत फंसगेला है, मैं तेरे को निकालेगा, फांसी से बचाएगा, अपुन सब रात क्राइम स्पॉट पे जारेला है, मैं अपना पिस्टल खुला रखेगा, मौका देख के तू पिस्टल निकालना, फायर करना, अंधेरे मे फुर्र हो जाना।”

मैंने असलम को रोका, “बंटा तू मेरे को फिल्म का स्टोरी सुनारेला है या, वही पुराना एनकाऊंटर का गेम बतारेला ए?”

– डॉ. एम. शहबाज

व्यंग्य लेखक एवं कार्टूनिस्ट

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