किताब : मुठभेड़ : घनसू डकैत से 59 घंटों की मुठभेड़ पर आधारित रोमांचक शोधपरक उपन्यास

मुठभेड़ : घनसू डकैत से 59 घंटों की मुठभेड़ पर आधारित रोमांचक शोधपरक उपन्यास
लेखक – विवेक अग्रवाल
पृष्ठ – 192 / अध्याय – 07

उत्तरप्रदेश के चित्रकूट जिले का गांव जमौली। एक आम भारतीय गांव। अचानक पूरी दुनिया की निगाहों का मरकज बन गया।

कारण था दुर्दांत डकैत घनश्याम केवट उर्फ घनसू उर्फ नान डकैत उर्फ बग्गड़ की 59 घंटों तक पुलिस के साथ चली मुठभेड़।

इस खौफनाक मुठभेड़ में कई पुलिस अधिकारी शहीद हुए। कई घायल हुए। पुलिस को तमाम आलोचनाएं झेलनी पड़ीं। तारीफ भी कम न हुई।

इस सत्य घटना पर आधारित कृति तैयार करने के लिए खासा शोध किया है। यह कहानी न डकैतों की है, न पुलिस वालों की। न अपराधियों की, न शहीदों की। न सम्मान की, न अपमान की। यह कहानी है नजरिए की।

दुर्दांत डकैत घनश्याम केवट उर्फ घनसू उर्फ नान डकैत उर्फ बग्गड़ से पुलिस की 59 घंटों की खौफनाक मुठभेड़ पर आधारित विवेक अग्रवाल लिखित पुस्तक मुठभेड़।

दुर्दांत डकैत घनश्याम केवट उर्फ घनसू उर्फ नान डकैत उर्फ बग्गड़ पुलिस की मुठभेड़ पर आधारित इस पुस्तक में कई रहस्यों का उद्घाटन होता है।

यह किताब उस दिन की पूरी तस्वीर उपन्यास रूप में प्रस्तुत करती है। भारतीय समाज की जातिगत व्यवस्था में आ चुकी सड़ांध से भी यह रूबरु करवाती है। अपराध-राजनीति के संबंधों का खुलासा करती है।

किताब ये ही नहीं बताती कि घनसू डकैत कितना दुर्दांत था, यह भी बताती है कि वह बागी बना तो क्यों।

किताब कई सवाल खड़े करती है, जिनके जवाब आज भी समाज और देश के रहनुमाओं-अगुओं से आने बाकी हैं।

द इंडिया इंक से प्रकाशित।

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