खूनी गिरोहबाज अबू सालेम के अनजाने हत्याकांड

इंद्रजीत गुप्ता

मुंबई, 22 मई 2022

1985-86 की बात है। मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट के पास मुसाफिर खाना के पास दुकान नंबर 7 की बगल में फुटपाथ पर तीन गुणा छह फुट के छोटे से बाकड़े (खोमचे, छपड़ी) पर अपने चचाजाद भाई अख्तर हुसैन के साथ पर उन दिनों एक सेल्समैन होता था। अख्तर हुसैन को नहीं पता था कि उसका यह चचेरा भाई एक दिन दुनिया भर में मशहूर डॉन बनेगा। यह सेल्समैन कोई और नहीं आज का लेडी किलर डॉन अबू सालेम है।

सड़क पर खड़े होकर सामान बेचने वाला काम अबू को रास नहीं आ रहा था। काम के बदले उसे पैसे तो मिलते लेकिन उतने भर से वह संतुष्ट न था। उसे लगता कि मोटी कमाई होनी चाहिए। धूप में दिन भर कमरतोड़ मेहतन करके, जो बचता, उससे अमीर बनने के ख्वाब देखने वाले अबू का काम तो चलने वाला नहीं था।

अबू भी अन्य दुकानदारों की तरह विदेश से आया सामान तस्करों से खरीद कर बेचाता था। उसमें कमाई कम थी। उसने पता किया कि बाकी लोग विदेशी सामान कहां से लाते हैं। अबू को जल्द ही पता चल गया कि नेपाल ही वह ठिकाना है, जो उसे अमीर बना सकता है। नेपाल में आने वाला जापान समेत कई देशों का माल ही तब तस्करी के जरिए बेचने के लिए मुंबई आता था।

अब अबू ने भी नेपाल का चक्कर लगाया। वह भी गोरखपुर-आजमगढ़ से गवाडीन, पीलीधारी और पेंट में लगने वाली केके कंपनी की जिप लाने लगा। ये सामान अबू और उसका चचाजाद भाई ट्रेन से लाने लगे। दोनों साथ मिल कर तस्करी करने लगे।

तस्करी में प्रवेश

यहीं से अबू सालेम ने तस्करी की दुनिया में कदम रखा। उस वक्त इस सामान की मुंबई में बहुत मांग हुआ करती थी। नेपाल में ये मॉल बहुत सस्ता मिलता था। अबू ने माल लाकर मुंबई बाचना शुरू किया तो तमाम माल हाथों-हाथ बिकने लगा। पैसे भी अधिक मिलने लगे।

अबू सालेम का कारोबार चल निकला था। अब तो उसने हाथ-पांव पसारने सुरू किए। वह नेपाल के साथ ही साथ दुबई भी जाने लगा। वहां से कपड़ा, कैमरा, परफ्यूम, कैमरा फिल्म जैसे तमाम सामान की तस्करी करने लगा। यह सामान दुबई में बहुत सस्ते में मिलता था।

दाऊद से मुलाकात

दुबई आने-जाने में अबू की मुलाकात दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई अनीस से हुई, जो कि एक जैसी फितरत होने के कारण जल्द ही दोस्ती में तब्दील हो गई।

अनीस ने अबू को एक-दो काम दिए, जो उसने बहुत अच्छी तरह से निभाए। इससे खुश होकर अनीस ने बड़े भाई दाऊद से अबू को मिला दिया।

अबू अब दाऊद के लिए काम करने लगा। अबू देखते ही देखते डी-कंपनी में बड़ा नाम होता गया। एक वक्त ऐसा भी आया कि अबू डी-कंपनी का सिपहसालार बन गया। वह भी दुबई चला गया। वहीं रह कर मुंबई के संगठित अपराध तंत्र का संचालन करने लगा।

जुलाहे का गुस्सा

दवना लालगंज गांव, आजमगढ़ जिले का का रहने वाला अनीस अहमद ने दुबई में हवाला का बड़ा कारोबार जमा रखा था। उसकी दुबई में कपड़े की एजंसी भी थी।

उन दिनों गवड़ी गांव, जिला आजमगढ़ मोहम्मद सरवर भी दुबई में रहता था। मोहम्मद सरवर उन दिनों ऐसा नाम था कि अरब लोग उसके पास ही ज़ुबा का कपड़ा लेते थे। उनके पास चाइना की एंब्रायडरी की 17 मशीनें थीं। एक मशीन की कीमत तकरीबन 20 लाख रुपए थी। ये मशीनें चलने वाले कारीगर सिर्फ मोहम्मद सरवर के पास थे। मोहम्मद सरवर का काम दुबई में एक नंबर था और बड़े ज़ोरों से चल रहा था।

अनीस अहमद भी उन दिनों हवाला कारोबार कर रहा था। वह भी इस एंब्रायडरी कारोबार में आना चाहता था। अनीस ने भी एंब्रायडरी की 10 मशीनें चीन से मंगाईं। अनीस के पास मशीनें तो आ गईं लेकिन कारीगर नहीं मिल रहे थे। अनीस ने मोहम्मद सरवर के कारीगरों को ज्यादा पैसे का लालच करके तोड़ा और अपने पास काम पर रख लिया।

इसी पर अनीस और मोहम्मद सरवर में बहस हो गई। उनके बीच बात बढ़ती गई। यह विवाद खत्म करने के लिए दोनों की दुबई में एक जगह बैठक हुई। उस बैठक में अबू सालेम भी आया। वो भी उसी जिले का था, जिसका मोहम्मद सरवर था।  

अनीस ने अबू सालेम को बुलाया था। अनीस अहमद की दोस्ती दाऊद का भाई छोटे भाई अनीस इब्राहिम से थी। किसी कारणवश अनीस इब्राहिम मीटिंग में नहीं आया इसलिए उसने अबू सालेम को अपनी जगह भेज दिया।

मोहम्मद सरवर ने जब मीटिंग में अबू सालेम को देखा तो पारा चढ़ गया। मोहमद सरवर ने भड़क कर कहा कि हमारी मीटिंग में अंसारी (जुलाहा) का क्या काम है? जुलाहा मुकरी क्या करने हमारी मीटिंग में आया है?

यह सुनते ही अबू सालेम का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह ज़ोर से गरज कर बोला कि सुन सरवर, तुम लोग इंडिया के किसी भी एयरपोर्ट पर आज के बाद उतर कर दिखाओ… गुस्से और नाराजगी में बैठक तो खत्म हो गई लेकिन अबू सालेम के दिल में मोहम्मद सरवर के कटाक्ष का कांटा गुड़ा ही रह गया।

मोहम्मद राईस पर हमला

उस बैठक में मोहमद सरवर का बड़ा भाई मोहमद राईस भी था। मोहमद सरवर तो भारत नहीं आया पर बड़े भाई मोहमद राईस भारत आया। दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर आते ही अबू सालेम के गुंडे ने उसे गोली मार दी। सुदैव से मोहमद राईस बच गया।

अबू सालेम के सुपारी हत्यारे की गोली लगने के कारण मोहम्मद राईस को लकवा हो गया। पांच-छह महीने इलाज चला लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। उसे शरीर के एक तरफ पूरी तरह लकवा मार चुका था। छह-सात महीने बाद मोहम्मद राईस दुबई चला गया।

उसके बाद वह दुबई से आजमगढ़ के गांव आता-जाता रहा लेकिन अबू सालेम ने उस पर दोबारा हमला नहीं करवाया।

मोहमद सरवर डर के मारे अपने गांव नहीं आ रहा था। आठ साल बाद वह दुबई से अपने गांव गवड़ी (आजमगढ़) आया। उसे पता था कि अबू सालेम कितना खुंदकी है। वह अपने बड़े भाई का अंजाम भी भूला नहीं था, लिहाजा वह बहुत सतर्क रहता था। उसने एक हथियारबंद बॉडीगार्ड भी साथ रखा हुआ था।

मोहम्मद सरवर पर घात

दूसरी तरफ अबू सालेम भी घात लगाए बैठा था कि मोहमद सरवर को कैसे मारे।

अबू सालेम ने अपने एक खास शूटर मोहमद ज़ाहिद को तैयार रखा था कि जैसे ही मौका मिले, मोहम्मद सरवर का काम तमाम कर दे।

वह मौका ताड़ता रहा। एक दिन मोहमद ज़ाहिद को मौका मिल गया।

ज़ाहिद ने एक चाल चली। वह मोहमद सरवर के घर गया। उससे कहा कि फलां जगह मेरी कुछ जमीन है। उसे बेचना है। आप खरीद लो।

मोहमद सरवर के साथ बॉडीगार्ड होता ही था। मोहमद ज़ाहिद भी आजमगढ़ का निवासी था। पूरा गांव उससे वाकिफ था।

मोहमद सरवर ने ज़ाहिद को मेहमान मान कर चाय-नाश्ते मंगवाया। बॉडीगार्ड हर समय मोहमद सरवर के साथ रहता ही था, आज भी वह चौकस खड़ा था। चाय-नाश्ते के बाद जैसे ही मोहमद सरवर ने बॉडीगार्ड से कहा कि नाश्ते की ट्रे घर के अंदर ले जाओ, जाहिद को मौका मिल गया।

बॉडीगार्ड जैसे ही ट्रे लेकर घर के अंदर गया, ज़ाहिद ने पिस्तौल निकाल कर मोहमद सरवर की दिशा में चार-पांच गोलियां दाग दीं। गोली की आवाज़ सुन कर जाहिद को ले जाने वाले साथी ने बाईक चालू कर ली। जाहिद आराम से टहलता हुआ बाहर आया। मोटर सयकिल पर बैठ कर भाग गया।

जाहिद गिरफ्तार

गोली की आवाज़ सुन गांव के कुछ लोग मोहमद सरवर के घर की तरफ भागे। कुछ लोग मोहमद ज़ाहिद को पहचानते थे। ज़ाहिद के नाम पर एफआईआर हुई। मुखबिरो की खबरनवीसी के बाद ज़ाहिद पकड़ा गया।

ज़ाहिद को पुलिस ने नैनी जेल भेज दिया। अब तो अबू सालेम ने आजमगढ़ में कहर बरपा दिया। उसके गुंडों ने गवाहों को धमकी देनी शुरू कीं। गवाहों के ससुराल पक्ष तक उसके गुंडे जा पहुंचते और उन्हें भी धमकी देते। एक गवाह का परिवार तो मुंबई में रहता था। उससे कहा कि अपने बेटी आपको सुहागन नहीं देखनी है तो अदालत में गवाही के लिए अपने दामाद को जाने देना। कोई अपनी बेटी को विधवा नहीं देखाना चाहते है, यह परिवार कैसे ऐसी अनहोनी चाहता। वे बेतहाशा डर गए। उन्होंने दामाद पर गहरा दबाव डाला और वह गवाही के लिए नहीं गया। इसी तरह सब गवाह डर गए, कोई भी अदालत नहीं गया।

जाहिद की हत्या

दूसरी तरफ मोहमद सरवर की मुख़्तार अंसारी से अच्छी दोस्ती थी। मुख़्तार अंसारी और मोहमद सरवर दोनों भागीदारी में जमीन का काम करते थे। मोहमद सरवर की मौत के बाद मुख़्तार ने उसके पिता को 80 लाख रुपए दिए।

मुख़्तार अंसारी ने हलफ उठाया कि अपने दोस्त की मौत का बदला लेगा। उसने जाहिद को ठिकाने लगाने की योजना तैयार की। उसका एक गुंडा अपराध करके जेल गया। उसने मौका देख कर जेल में ही ज़ाहिद का काम तमाम कर दिया।

सालेम के खूनी खेल

अबू सालेम कैसा खतरनाक खूनी खेल रचाता रहा है, उसकी एक और बानगी पुराने वक्त के जानकार बताते हैं।

अबू सालेम ने ज़ाहिद से एक और हत्या कराई थी। उसके लिए मोहमद अनीस ने कहा था।

मोहमद अनीस का हवाला कारोबार उसी के गांव का आदमी सरवर उर्फ़ खदर संभालता था। खदर हवाला की रकम उधर-उधर पहुंचाता था। कभी उसका ईमान खराब नहीं हुआ था।

एक दिन मो. अनीस का पैसा लेकर खदर आजमगढ़ से खदर निकला। आजमगढ़ और बनारस के बिच घाघरा नदी के पुल पर खदर से किसी ने पैसे लूट लिए। वह इलाका है भी बड़ा सुनसान सा ही। वहां कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था।

इलाके के पुलिस थाने चंदवक पुलिस स्टेशन में खदर पहुंचा। उसने थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी कि उसके साथ लूट हो गई है। इसकी खबर मो. अनीस को फोन करके खदर ने दी।

सारी जानकारी मो. अनीस को दी कि उसके साथ क्या-क्या हुआ और कैसे पैसे लुटे गए। उसने कहा कि मेंने एफआईआर भी कर दी है।

मो. अनीस को शक हो रहा था कि वो झूठ बोल रहा है। खदर की नीयत ख़राब हो गई है इसलिए कहानी बना रहा है।

मो. अनीस ने सरवर से कहा कि मेरा पैसा लुटा नहीं है। पैसा तेरे ही पास है। मेरा पैसा वापस दे खदर। मुझे पैसा वापस चाहिए वर्ना तेरी खैर नहीं।

खदर बार-बार कहता रहा कि पैसा लुट गया है, मेरे पास नहीं है। मैं आपसे गद्दारी नहीं कर सकता हूं। मेरे पास पैसे नहीं हैं। मो. अनीस बार-बार पैसा मांगता रहा। जब खदर ने मो. अनीस को पैसे नहीं लौटाए तो उसने यह बात अबू सालेम को बताई और उसे मार गिराने के लिए कहा।

अबू सालेम ने यह काम अपने खास शूटर ज़ाहिद से करवाया। खदर का गांव दवना तो से दो किलोमीटर दूर देवगांव बाजार लगता है। खदर देवगांव बाजार से कुछ सामान लेकर घर लौट रहा था। वहीं से ज़ाहिद ने उसका पीछा किया और मौका मिलते ही खदर को गोली मार कर गायब हो गया।

यह वाकया मोहमद सरवर की हत्या से आठ-दस दिन पहले का ही है। ज़ाहिद ने अबू के इशारे पर दो हत्याएं की थीं।

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