शराब माफिया की कोरोना लॉकडाऊन में बल्ले-बल्ले

विवेक अग्रवाल

मुंबई, 17 अप्रैल 2020

मुंबई समेत सारे देश में एक तरफ जहां लोग डाउन की समस्या से दो-चार हैं, ऐसे वक्त में असामाजिक तत्व फायदा उठाने में लगे हैं। शराब के शौकीनों और तलबगारों की जेब काटने में शराब माफिया जुटा है। बाजार भाव से चार से पांच गुना कीमत पर शराब की अवैध सप्लाई का खेल सरकार की नाक के नीचे धड़ल्ले से जारी है।

रात 11 के बाद

सूचना मिल रही है कि शराब की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी हो रही है।

राज्य सरकार की आंखों में धूल झोंक कर शराब माफिया 3 से 5 गुना अधिक कीमत पर शराब की तस्करी और बिक्री कर रहा है।

शराब दुकानों और परमिट रूम से रात 11 बजे के बाद या तो उनके पास तक आने वालों को दी जाती है, या घर पहुंच सेवा की जा रही है।

जिनके पास शराब दुकानों या होटलों के नंबर हैं, वे फोन करके शऱाब की मात्रा बता देते हैं। उन्हें उतनी शराब घर तक पहुंच जाती है।

सूचना मिली है कि रात को इमारतों के मुख्य दरवाजे तक डिलीवरी ब्वॉय पहुंचते हैं। जिनके लिए शराब की खेप लाए हैं, उन्हें फोन करके बताया जाता है कि उनका बताया ‘सामान’ आ चुका है, गेट से हासिल कर लें। कई सोसाइटी में डिलीवरी घर तक देने पर पाबंदी लग चुकी है। शराब से शौकिनों और तलबगारों को मुख्य दरवाजे तक आकर शराब हासिल करने में कोई परहेज भी नहीं होता है।

पता चला है कि कुछ होटल मालिक तो खाना पहुंचाने के नाम पर शराब की सप्लाई बड़े आराम से कर रहे हैं। खाने के साथ ही शराब की बोतलें भी बैग में पैक करके पहुंचाई जा रही हैं।

किसकी कीमत कितनी

मुंबई में इन दिनों मैकडोवेल नंबर वन का एक क्वार्टर (180 मिली की बोतल) 700 से 800 रुपए में बिक रहा है, जिसकी एमआरपी मात्र 160 रुपए है।

इतना ही नहीं 250 रुपए कीमत का सिग्नेचर क्वार्टर 1,100 से 1,200 रुपए पर कालाबाजारियों द्वारा बेचा जा रहा है।

ब्लेंडर्स प्राइड का क्वार्टर 300 रुपए में आम दिनों में उपलब्ध होता है लेकिन फिलहाल 1,300 से 1,500 रुपए कीमत पर तस्कर बेच रहे हैं।

सिग्नेचर लगभग 260 रुपए का होता है, जो फिलहाल 1,300-1400 रुपए में बिक रहा है।

यही स्थिति एंटीक्विटी के 300 रुपए वाले क्वार्टर की है, जो फिलहाल 1,400 से 1,500 रुपए कीमत पर बेचा जा रहा है।

बोतलों के दाम

मुंबई में ब्लैक लेबल की पूरी बोतल (1000 मिली) तकरीबन 2,500 रुपए, डबल ब्लैक तकरीबन 3000 रुपए, वाइट ब्लैक तकरीबन 4000 रुपए, मैकडोवेल नंबर वन तकरीबन 750 रुपए, सिग्नेचर तकरीबन 1,200 रुपए, ब्लेंडर्स प्राइड तकरीबन 1,600 रुपए, एंटीक्विटी तकरीबन 1,400 रुपए में आम दिनों में मिल जाती हैं।

ये सभी आज लगभग 4 से 5 गुना अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। शराब दुकान या होटल वाले पूरी बोतल खरीदने पर जोर दे रहे हैं। ब्लैक लेबल की बोतल आज लॉकडाऊन के दौर में 12 से 14 हजार में बेच रहे हैं।

किंगफिशर माइल्ड बियर का 600 मिली का केन 120 रुपए और बडवाइजर का केन 175 रुपए में आम दिनों में मिलता है। आज यही किंगफिशर 400 और बडवाईजर 550 से 600 रुपए में बेची जा रही है।

इतना ही नहीं बीयर के लिए कम से कम 12 केन का आर्डर जरूरी होता है। पूरी रकम नगद में वसूली जा रही है

शराब माफिया की कोरोना लॉकडाऊन में हो गई पौ-बारह, सरकार को राजस्व का भारी नुकसान

सरकार को राजस्व का भारी नुकसान

भारत सरकार का शराब बिक्री पर लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए सालाना राजस्व उगाहा जाता है, जिसमें उत्तरप्रदेश 26,000 करोड़ रुपए सालाना के हिसाब से सबसे पहले नंबर पर है।

इसके बाद 24,000 करोड़ रुपए के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर आता है।

शराब बिक्री पर सबसे अधिक सेस लगाया जाता है, जिससे सरकारों को मोटी कमाई होती है।

कोरोना के दौर में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के कारण सरकार को तगड़ा नुकसान तो हो ही रहा है, शराब माफिया की तो मौज हो गई है।

ड्यूटी-फ्री शॉप से तस्करी

बता दें कि शराब माफिया देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर भी बड़े पैमाने पर सक्रिय है।

मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी शराब माफिया ड्यूटी फ्री शॉप से शराब बाहर निकालते हैं। इसके लिए मजदूरों और पेशेवर कारीगरों का इस्तेमाल होता है।

विदेशों से आए मजदूरों और पेशेवर कारीगरों के पासपोर्ट और बोर्डिंग पास पर शराब की बोतलें बाहर मंगवाई जाती हैं। एक बोतल पर उन्हें 100 से 300 रुपए दिए जाते हैं।

बाजार में यही शराब ड्यूटी फ्री शॉप की होने के नाम पर बाजार भाव से भी अधिक कीमत पर बिकती है। शराब माफिया को इस धंधे में मोटा फायदा होता है।

समय, मांग और डॉलर भाव के हिसाब से ड्यूटी-फ्री शॉप की शराब के भावों में उतार-चढ़ाव आता है।

ड्यूटी-फ्री शॉप की ब्लैक लेबल की एक बोतल 2,200 से 2,500 रुपए की होती है, जो बाजार में बड़े आराम से 3,500 तक बिक जाती है।

शराब तस्करी केंद्र गोवा, दमन, दीव

गोवा में सबसे सस्ती शराब बेची जाती है। जो रॉयल चैलेंज शराब की पूरी बोतल महाराष्ट्र में 1,080 रुपए में मिलती है, वही गोवा में मात्र 550 रुपए की है। इसके कारण गोवा से भी बड़ी मात्रा में महाराष्ट्र शराब तस्करी होती है।

इतना ही नहीं दमन और दीव क्षेत्र भी महाराष्ट्र में शराब तस्करी के बड़े केंद्र हैं।

आंकड़ों में शराब

  • देश की अर्थव्यवस्था के साथ शराब का बाजार भी भारत में तेजी से बढ़ा है।
  • शराबखानों और रेस्टो-बार की संख्या देश में तेजी से बढ़ी है।
  • शराब की कीमतें बढ़ने के बाद भी न मांग कम हुई, न खपत घटी है।
  • पाबंदियों व चेतावनी के बाद भी शराब की खपत देश में बढ़ी है। देश में शराब के विज्ञापनों पर रोक है।
  • भारत में 16 करोड़ लोग शराब पीते हैं। भारत सरकार के केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के संयुक्त सर्वेक्षण में जारी आंकड़े बताते हैं।
  • 10 से 75 साल आयु वर्ग के 14.6 प्रतिशत लोग याने करीब 16 करोड़ लोग शराब पीते हैं। छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पंजाब, अरूणाचल प्रदेश, गोवा में शराब का सर्वाधिक इस्तेमाल।
  • शराब के लती लोगों में 38 को चिकित्सा करवानी पड़ी है। 180 में से एक को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है।
  • भारत में शराब खपत 2018 में 27,382 लाख लीटर हो गई, जो 2008 में 16,098 लाख लीटर थी। इसमें बीयर और वाइन के आंकड़े शामिल नहीं।
  • भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल (एसोचैम) के मुताबिक भारत में शराब की खपत 19 अरब लीटर सालाना है।
  • इसमें सालाना लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होता है।
  • दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शराब का बाजार भारत है। यह सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है।
  • भारत संसार में व्हिस्की का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।

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