लॉज की यारी…: उपन्यास अंश… दत्तात्रय लॉज: लेखक – विवेक अग्रवाल

देव कुमार अब डायरेक्टर हो गया। रहा वही मीठा और चीठा। सारे जहान को सेट पर बुला-बुला कर दिखाने लगा कि देश के सबसे बड़े हीरो और हीरोईन की फिल्म का निर्देशन कर रहा हूं।

लोग आते, देव कुमार के हाव-भाव देखते, सराहते, खाना खाते, चाय-ठंडा पीते, चले जाते।

देव कुमार दिन में शूटिंग करता, रात में उन लोगों की खातिरदारी का लुत्फ उठाता, जिन्हें सेट पर बुला कर उसने प्रोड्यूसर के पैसों पर खातिरदारी करवाई थी।

27 दिनों की शूटिंग के दौरान देव कुमार ने दो फिल्मों का निर्देशन हासिल कर लिया।

पहली फिल्म ‘मंहगी गुड़िया’ में इंडस्ट्री की बहुत बड़ी और हॉट हिरोईन को लिया।

दूसरी फिल्म ‘दावानल की आग’ में बड़ा कमाऊ हीरो आ गया।

दोनों हीरो-हिरोईन इंडस्ट्री में नंबर दो हैं। कांट्रेक्ट साईन हो गया। हाथ में मोटी रकम एडवांस आ गई।

देव कुमार ने तुरंत दत्तात्रय लॉज छोड़ दी। सारे स्ट्रगलर यही करते हैं, सो परंपरागत तौर पर उसने भी यही किया।

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