तब्लीगी आरोपों पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री, महाराष्ट्र के कुछ ज्वलंत सवालों के जवाब कौन देगा?

गृहमंत्री, महाराष्ट्र अनिल देशमुख ने 8 अप्रैल 2020 को कोरोना वायरस और इसके तब्लीगी जमात से संबंध पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से सवाल पूछते हुए पत्र जारी किया, जो काबिले-गौर है। पत्र शब्दशः इस प्रकार है:

मुंबई के उपनगर वसई में 15 और 16 मार्च 2020 को तब्लीगी इकट्ठा होने वाले थे, तब उसकी इजाजत महाराष्ट्र शासन के गृह विभाग ने रोकी।

  1. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निजामुद्दीन, दिल्ली के तब्लीगी मरकज में इज्तेमा के आयोजन को इजाजत कैसे दी?
  2. निजामुद्दीन के मरकज के बिलकुल नजदीक निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन है। इसके बावजूद उन्होंने यह कार्यक्रम को क्यों नहीं रोका? क्या इसके लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार नहीं है?
  3. इस तरह मरकज में इतने सारे लोग नाजायज इकट्ठा हुए, जिससे कोरोना पूरे राज्य में फैला। क्या इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय जिम्मेदार नहीं है?
  4. किसने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल को रात दो बजे मरकज में भेजा? क्यों भेजा? क्या यह काम नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर का है या दिल्ली पुलिस कमिश्नर का?
  5. नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल और तब्लीग के मुखिया मौलाना साद रात दो बजे मरकज में ऐसी क्या गुप्त मंत्रणा कर रहे थे?
  6. नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर और पुलिस कमिश्नर, दिल्ली, ने अभी तक इस बारे में कोई बयान क्यों नहीं दिया?
  7. अजीत डोवाल को मिलने के बाद दूसरे दिन मौलाना साद कहां फरार हो गए? अब वे कहां हैं?
  8. तब्लीगियों के साथ किसके संबंध हैं?
  9. मरकज के प्रोग्राम में इजाजत तुम्हारी!
  10. प्रोग्राम होने से तुमने रोका नहीं!
  11. तब्लीगी जमात से संबंध तुम्हारे!

इन सारे सवालों का जवाब कौन देगा?

इस पत्र के नीचे अनिल देशमुख के हस्ताक्षर हैं।

उनके लेटरहेड पर जारी पत्र की प्रति राम सचान ने फेसबुक पर डाली है।

From FB Wall of Rishikesh Rajoria

April 09, 2020

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लेख में प्रकट विचार लेखक के हैं। इससे इंडिया क्राईम के संपादक या प्रबंधन का सहमत होना आवश्यक नहीं है – संपादक

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