जिला आपदा प्रबंध समिति’ अथवा “भाजपा कोर ग्रुप?”

निरुक्त भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार, उज्जैन

उज्जैन में सोमवार को जब जिला आपदा प्रबंध समिति की बैठक हुई और उसका आधिकारिक ब्यौरा जारी किया गया तो मैंने अपना माथा ठोक लिया! उसमें एक पंक्ति ये भी थी, “गुड़ी पड़वा पर रामघाट के आसपास के मंदिरों का रंग-रोगन और सफाई करवाई जाए”…बताते हैं कि ये सुझाव बैठक में शामिल किसी माननीय ने दिया!

ये सूरत-ए-हाल उज्जैन जिले का ही नहीं है, बल्कि कमोबेश पूरे मध्यप्रदेश की सूरत भी कुछ इसी तरह की है! ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि जिला आपदा प्रबंध समिति की क्या गंभीरता अब शेष है? जो फोटो शेयर कर रहा हूं उनमें एक कैबिनेट मंत्री सहित दो शहर के भाजपा विधायक, उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र के भाजपा के टिकट से निर्वाचित लोक सभा सदस्य सहित भारतीय जनता पार्टी के शहर एवं जिला (ग्रामीण) इकाई के अध्यक्ष दिखाई दे रहे हैं. जो अन्य मुखड़ों के दर्शन हो रहे हैं, उनमें कलेक्टर साहब, एसपी साहब और कतिपय अन्य अफसर शामिल हैं.

जब युद्ध स्तर पर कोरोना महामारी से बचने और लड़ने की आवश्यकता है, तब भी शासन और प्रशासन स्तर पर आखिर क्यों ‘दलीय व्यवस्था’ को बढ़ावा दिया जा रहा है? क्या उज्जैन जिले में सिर्फ दो ही विधायक हैं? इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट खोलें तो मालूम पड़ेगा कि जिले की 7 विधान सभा सीट में से 3 भाजपा के पास हैं और शेष 4 कांग्रेस के पास! मगर लगता है कि ‘जिला आपदा प्रबंध समिति’ के नाम पर कुछेक ही जनप्रतिनिधियों को शामिल कर ‘मनमाने’ और ‘व्यावसायिक’ निर्णय समूचे जिलेवासियों पर थोपने की रणनीति को सरकार के इशारे पर अंगीकृत कर लिया गया है, पूरे प्रदेश में…

मेरा निवेदन है कि कृपया ‘जिला आपदा प्रबंध समिति’ की अहमियत, उसके गठन, क्षेत्राधिकार, कार्य और कार्यवृत्त को लेकर केंद्र और राज्य सरकार तथा सम्बंधित एजेंसियों द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धांत को भी गूगल सर्च पर जाकर देखा जाए!…आप पाएंगे कि इस तरह की समितियों को अस्तित्व में लाने के पीछे एकमात्र उद्देश्य तात्कालिक और दीर्घकालिक संकट के समय सभी शासकीय एजेंसियों में बेहतर समन्वय बैठाना रहा होगा! इसमें स्पष्ट तौर पर प्रावधान किए गए हैं कि चुनिन्दा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-ही सेना, नगर सेना, गैर-सरकारी संगठनों के विशेषज्ञों, समाजसेवियों इत्यादि को शामिल कर ऐसी समन्वित व्यूहरचना की जाए कि जनसामान्य को राहत मिल सके.

मैं जिला आपदा प्रबंध समिति, उज्जैन की दिनांक 12 अप्रैल 2021 की बैठक के सार्वजनिक किए गए ब्यौरे पर लौटना चाहता हूं: इस बैठक में वो महत्वपूर्व निर्णय, जो इसी समिति की 10 अप्रैल 2021 की ‘अत्यंत गोपनीय’ बैठक में लिए गए थे, उनको बदल दिया गया! ‘कोरोना कर्फ्यू’ के दौरान सुबह-सुबह मिलने वाली छूटों और दिनभर में मिलनेवाली सहूलियतों को एक ही दिन में वापस ले लिया गया! फरमान जारी किया गया कि अब कुल मिलाकर 4 घंटे ही दिए जाएंगे: सुबह 6 से 10 बजे के बीच दूध, सब्जी/फल, किराना, इत्यादि खरीदने के लिए! 10 बजे के बाद कानून का राज होगा (आप समझ रहे हैं ना)!… 

कोरोना महाराजा के साथ कदमताल करते राज्य की सत्ता में पीछे के दरवाजे से दाखिल हुए श्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पार्टी भाजपा, आरएसएस में बैठे उनके मार्गदर्शक और कथित ‘कोर समितियां’ आखिर किस तरह का नजरिया लेकर सार्वजनिक जीवन में आचरण कर रहे हैं? कोई आम नर-नारी से पूछे तो सारे माजरे सामने आ जाएंगे!…एक साल से आपदा को अवसर में भुनाने में संलिप्त ये पूरा कुनबा जरा ये तो बताए कि मेरे मध्य प्रदेश को क्यों मेडिकल इमरजेंसी के दौर में इस कदर तड़पाया जा रहा है…???

लेखक उज्जैन के वरिष्ठ पत्रकार हैं। विगत तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। संप्रति – ब्यूरो प्रमुख, फ्री प्रेस जर्नल, उज्जैन

(उक्त लेख में प्रकट विचार लेखक के हैं। संपादक मंडल का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)

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