सावधान: जब बैंक से हो परेशानी तो क्या करें!

विवेक अग्रवाल

मुंबई के एक बड़े व्यापारी नीरज मेहरा (नाम परिवर्तित) को यह देख बड़ा अचरज हुआ कि एक बहुराष्ट्रीय बैंक के निजी खाते में एक लाख रुपए की रकम कम थी। एक ऐसे व्यक्ति को यह रकम उनकी गुम चेकबुक के एक चेक पर जारी हुई थी, जिसके बारे में उन्होंने नौ माह पहले ही बैंक में न केवल शिकायत दर्ज करवाई थी, बल्कि पुलिस में भी रपट दर्ज की थी।

जब नीरज बैंक अधिकारियों से मिले तो उन्होंने कह दिया कि छह माह बाद उन्हें चेकबुक गुम होने की शिकायत फिर से दर्ज करवानी थी। नीरज ने कहा कि यह भले ही बैंक नियमों के अनुसार उनकी गलती हो, लेकिन जिस चेक का बैंक ने भुगतान कर दिया है, उस पर उनके नकली हस्ताक्षर हैं। उसका भुगतान करके वे एक घोटाले को कैसे प्रश्रय दे सकते हैं। इसमें निश्चित ही कोई बैंककर्मी भी शामिल है। बैंक अधिकारी जब उनकी कोई दलील सुनने के लिए राजी न हुए तो नीरज ने बैंक और अनजान लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद बैंक अधिकारी तुरंत हरकत में आ गे। नीरज का पैसा अगले ही दिन उनके खाते में जमा कर दिया।

नीरज ने इस मामले में बैंक से लिखित में इस मामले में गलती मानने और माफी मांगने को कहा। वे ऐसा करने के लिए तैयार न हुए। नीरज ने तुरंत बैंक से खाता बंद कर दिया। इसकी शिकायत उन्होंने बैंक के उच्चाधिकारियों को भी ईमेल से भेजी। उनकी बैंक शाखा के तमाम अधिकारी उनके सामने हाथ जोड़ते रह गए लेकिन उन्होंने अपने तमाम खाते वहां से बंद करके ही दम लिया।

सवाल यह उठता है कि बैंकों को आप किस रूप में देखते हैं?

आपकी सुविधा के लिए बनाए संगठन के रूप में, जहां आप अपने पैसे जमा रखते हैं, जहां अपने मंहगे और महत्वपूर्ण सामान व दस्तावेज रखते हैं, जिसके एटीएम का इस्तेमाल कभी भी पैसे निकालने के लिए कहते हैं, बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से बिना परेशानी खरीददारी करते हैं। कई बार लेकिन आप अपने ही बैंक के बंधक बने महसूस करते हैं।

ऐसे में आपको खास सावधानी बरतनी चाहिए। खासतौर पर निजी बैंकों के मामले में आप आवश्यकता से अधिक सावधानी बरतें तो अच्छा रहेगा।

आपकी जेब पर डाका डालने के लिए जरूरी नहीं है कि कोई बंदूक का इस्तेमाल करे, नियमों व कानून का सहारा लेकर भी आपकी जेब मजे में कोई हल्की कर सकता है, खासतौर पर बैंक।

ऐसे में हम बता रहे हैं कि आप बैंक के साथ कारोबार करें तो क्या-क्या सावधानी बरतें:

  • एक ही बैंक में खाता न रखें। एक बैंक आपका खाता जाम कर दे तो क्या होगा? आपका दूसरे बैंक एक खाता जरूर होना चाहिए और उसमें भी कुछ रकम जरूर होनी चाहिए।
  • एक ही बैंक में अपनी तमाम जमाराशियां फिक्स डिपॉजिट, रेकरिंग इत्यादि में कभी भी न रखें। बैंक के साथ कोई समस्या होने पर, आपकी ये रकम भी फंस सकती हैं। वक्त पर आपको इन्हें वापस लेने में तकलीफ हो सकती है। दो या तीन बैंकों में अपनी जमाराशियां रखना बुद्धिमानी होगी।
  • बैंक से कोई बड़ी समस्या हो तो सबसे पहले अपनी रकम का बड़ा हिस्सा कोई कड़ा कदम उठाने के पहले दूसरे बैंक में स्थानांतरित जरूर कर दें।
  • अपने बैंक को सख्त हिदायत दें कि आपका फोन नंबर, ई-मेल पता और घर या दफ्तर का पता कभी भी, किसी को भी, किसी हाल में न दें।
  • डू नॉट डिस्टर्ब या डीएनडी अधिकार का उपयोग करें, जिसके तहत आप बैंक की तरफ से कोई भी व्यक्ति आपको प्रमोशनल स्कीम के लिए फोन न करे।
  • बैंक से मिलने वाले प्रलोभनों से बचें। उनके द्वारा नए खातों या जमाराशियों पर मिलने वाले जबानी जमा खर्च वाले लालच के फोन आने पर कहें कि आपको तमाम बातें आपके ई-मेल पर भेजें। उसमें आपको कोई भी गड़बड़ लगे तो अपने वित्त सलाहकार या किसी जानकार से अवश्य पूछताछ कर लें। उसके बाद ही किसी भी बैंक की नई योजनाओं में पैसे लगाएं।
  • जब बैंक खातों से संबंधित नियमों में बदलाव आते हैं, तो उनका बारीकी से अध्ययन करें। अगर आपको लगे कि इस तरह आप उनके बंधक हो गए हैं या नए नियम जेब काट सकते हैं, तो उस बैंक में खाता बंद कर अधिक सुविधाजनक बैंक की ओर जाने में देर न करें।
  • बैंक के तमाम नियमों की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। वे नियम जरूर पता करें, जिनमें चेक या खातों में छेड़छाड़, एटीएम इस्तेमाल, सीधे खाते से किए जाने वाले बिल भुगतान इत्यादि शामिल हैं। बैंक से रिश्ता बनाने के पहले ये जानकारियां लेना आपके हित में होगा।
  • बैंक की ऑनलाइन बैंकिंग व्यवस्था का इस्तेमाल जरूर करें। सबसे पहले देखें कि ऑनलाइन बैंकिंग के लिए बैंक के नियम क्या हैं। यह भी देखें कि क्या ये सेवाएं मुफ्त हैं। यदि कोई शुल्क लगता है, तो कितना है। यह जानकारी भी पहले ही जाहिस करें।
  • बैंक से पता करें कि आपका खाता कोई ऑनलाइन हैक करता है, तो ऐसे अपराध से आपको वह बैंक विशेष कितनी सुरक्षा देता है।
  • हमेशा याद रखें – जब आप ऑनलाईन खाते में यूज़र नेम और पिन (या पासवर्ड) डाल रहे हैं, आपको कोई देख न रहा हो। ऑनलाईन खाते के यूज़र नेम और पिन (या पासवर्ड) का गोपनीय रहना बेहद जरूरी है। यह अपने बच्चों से भी छुपा कर रखें। इन्हें कभी भी लिख कर न रखें।
  • अपनी पासबुक नियमित अंतराल पर अपडेट करएं। देखते रहें कि खाते में हो रहे लेन-देन आपके ही किए हैं या नहीं। कोई गड़बड़ दिखे तो तुरंत बैंककर्मियों को बताएं। बैंक को उसकी गलतियां बताने से कभी न झिझकें। इसमें आपका ही फायदा है। यदि कोई गड़बड़ी है, तो तुरंत लिखित में बैंक को ईमेल करें या खुद बैंक मैनेजर को दें। आपके पत्र पर बैंककर्मी से प्राप्ति की रसीद अवश्य लें।
  • अपनी तरफ से कोई गलती करने से हमेशा बचें ताकि बैंककर्मी उसका सहारा लेकर आपको फंदे में न फांस सके।
  • हर सबूत हमेशा लिखित में एक फाईल में लगा कर रखें। यह वक्त पड़ने पर बैंक के सामने पेश करेंगे तो उनके फंदे में आने से बच जाएंगे।
  • ऑनलाइन खरीददारी करते समय खासी सावधानी बरतें। अपने ब्राऊजर की सेटिंग ऐसी करें कि बेवजह कुकीज, मालवेयर, स्पाईवेयर इत्यादि कंप्यूटर में न जमा हों। इनसे ऑनलाईन खाते के यूज़र नेम और पिन (या पासवर्ड) के चोरी जाने का खतरा नहीं रहेगा।
  • बैंक के साथ कोई गड़बड़ी हो जाए, तो समस्या से संबंधित जानकारियां रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की वेबसाईट पर जाकर देखें। यदि समाधान न मिले तो पहले बैंक को लिखें। एक महीने तक यदि बैंक आपकी समस्या का समधान न करे तो आरबीआई ओंबड्समैन या लोकपाल को लिखें।
  • यदि आपके नाम अनावश्यक सामान या सेवा का शुल्क लगाने की जानकारी खाते में मिले, तो तुरंत बैंक से कहें कि इसे रोकें। खाते से यदि रकम निकाली जा चुकी है, तो वापसी के लिए भी फौरन बैंक को लिखें। नियमानुसार आपके खाते में रकम बैंक को जांच पूरी होने के पहले ही जमा करनी होती है, न कि बाद में। बैंककर्मी यदि पैसे बाद में जमा करने की जिद करें, तो आरबीआई लोकपाल से शिकायत करें।
  • किसी गड़बड़ी की स्थिति में बैंक को हमेशा लिखित शिकायत करें। ईमेल करना सबसे अच्छा होता है। उनसे छानबीन के लिए जरूर कहें। उनसे हमेशा शिकायत की हस्ताक्षरित प्रतियां मांगें। उनके ना कहने पर भी जरूर हासिल करें, किसी भी हालत में। यह आपका अधिकार है। बैंक आपको सेवा देते हैं, वे आप पर अहसान नहीं करते। हम अपना पैसा बैंक में रख कर उस पर अहसान करते हैं।
  • यदि बैंककर्मी कहें कि पुलिस में घोटाले या गड़बड़ी की शिकायत करने की जरूरत नहीं है, तो भी अपनी तरफ से शिकायत जरूर करें। हो सकता है कि बैंककर्मी खाल बचाने के लिए आपको पुलिस में जाने से रोक रहे हों।
  • अपनी बात पर हमेशा अडिग रहें, लेकिन उतने ही शांत रहें। आपको सहायता करने की मीठी पेशकश से बैंककर्मी मन मोहने का प्रयास करेंगे लेकिन झांसे में आने की जरूरत नहीं है। आप उन पर अनावश्यक दबाव न बनाएं लेकिन कहें कि आपकी स्थिति में खुद को रख कर देखें, फिर बात करें।
  • हार न मानें। बुरे से बुरे हाल में भी देखना चाहिए कि हम कितने दृढ़निश्चयी और इन हालात से निपटने में सक्षम हैं।
  • बैंक आपसे अगर न्याय न करे, आपको संतोष न हो, तो बैंक बदलने में देर न करें।

और अंत में

आपका बैंक अगर अपनी गलती के बावजूद, आपको संतोषप्रद सेवा न दे, तो कानूनी सहायता हासिल करने से न चूकें। बैंक को उपभोक्ता अदालत का मुंह जरूर दिखाएं।

और यह भी करें

अखबारों व पत्रिकाओं के ‘उपभोक्ता मसलों’ या ‘पत्र लेखक के नाम’  स्तंभों में समस्या जरूर लिख भेजें ताकि बैंक ऐसी गलतियां करने से बाज आएं। उससे बाकी उपभोक्ताओं को भी बैंक की सही जानकारी मिल सकेगी।

आज सोशल मीडिया पर सभी बैंकों की मौजूदगी है। अपनी शिकायत में बिना अपना बैंक खाता नंबर लिखे बैंक को टैग और हैशटैग के जरिए पूरी बात या शिकायत जरूर पहुंचाएं।

यह भी पढ़ें: बैंक करे परेशान तो बैंकिंग लोकपाल या आरबीआई ओंबड्समैन से करें शिकायत

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