किताब : अदृश्य

किताब : अदृश्य
लेखक – विवेक अग्रवाल – अलका अग्रवाल सिगतिया
पृष्ठ – 200 / अध्याय – 18

एक फिल्म का साहित्यिक कृति में बदलने का साहसिक अभियान इस किताब से सामने आता है।

विख्यात लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया के साथ पहले इसकी पटकथा लिखी, फिर उपन्यास में तब्दील कर दिया।

एक बच्चे की मार्मिक कहानी, जो फिल्म और उपन्यास में बिल्कुल अलग तरीके से पेश हुई है।

रजतपटल पर साकार एक कृति को साहित्यिक रूप में ढालने का, ये अपने-आप में अनूठा और ऐतिहासिक प्रयोग है।

हमारा विचार है कि फिल्म कुछ समय के लिए होती है लेकिन किताब सदा के लिए।

इस कहानी में एक सार्वभौमिक व शाश्वत समस्या उठाई है। इस पर भाषण देने के बजाए ‘हॉरर’ और ‘मिस्ट्री’ की चाशनी में लपेट कर आकर्षक रूप में पेश करने की कोशिश है।

पौराणिक आख्यानकों का राजकुमार ध्रुव, जैसे अपने पिता राजा उत्तानपाद के स्नेह व दुलार के लिए तरसता है, हमारी कथा का नायक ध्रुव भी माता-पिता का प्यार और अपनत्व पाने के लिए तरसता है।

यह कहानी है ध्रुव-तारा की। तारा क्यों? यह तो फिल्म देख कर या किताब पढ़ कर ही आपको पता चलेगा।

किताब फिल्म की सजीव तस्वीरों से सजी है।

केके प्रकाशन से प्रकाशित। सर्वाधिकार द इंडिया इंक के पास सुरक्षित।

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