लोकसभा चुनाव 2019 सट्टा: पहले चरण के बाद भाजपा के भाव बिगड़े

  • भाजपा की सीटें कम की सट्टाबाजार ने
  • सटोरियों को अब भी भाजपा प्रणित सरकार का भरोसा
  • 72 हजार रुपए सालाना कार्ड पर विश्वास नहीं
  • अमेठी में राहुल गांधी की जीत का भरोसा नहीं

विवेक अग्रवाल

मुंबई, 13 अप्रैल 2019

वर्तमान लोकसभा चुनाव के पहले चरण में एक तरफ जहां भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं, दूसरी तरफ विपक्षी दल राहत की सांस लेते दिख रहे हैं, तीसरी तरफ मुंबई का राजनीतिक सट्टाबाजार तेजी देख रहा है। मुंबई सट्टाबाजार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सीटों में गिरावट तो कांग्रेस की सीटों में उछाल देख रहा है। इतना ही नहीं सट्टाबाजार में अभी भी सरकार तो एनडीए की बनने के बारे में ही बात हो रही है।

भाजपा की सीटें हुईं कम

चुनाव के पहले चरण बाद सट्टाबाजार ने भाजपा की सीटों की गिनती कम कर दी है। कहा जा रहा है कि शुरूआती भाव खुलने के मुकाबले भाजपा की पांच से 10 सीटें कम होंगी।

सटोरियों का आकलन है कि भाजपा को अब 240 से 242 सीटें ही मिलेंगी, जबकि कांग्रेस को 80 से 82 तक सीटें मिलेंगीं। कांग्रेस की सीटें शुरूआती आकलन से कुछ बढ़ी हैं। सटोरियों का कहना है कि सीटों में बढ़त और कमी आगामी चरणों के साथ बदलती रहेगी।

सरकार के भाव

चुनाव जीत पूर्ण बहुमत से अकेले दम भाजपा के सरकार बनाने पर साढे तीन रुपए का भाव चल रहा है।

कांग्रेस के अकेले दम सरकार बनाने पर ढाई सौ रूपए का भाव है।

एनडीए की सरकार बनने पर 25 पैसे तो यूपीए की सरकार बनने पर 10 रुपए का भाव है। महागठबंधन के सरकार बनाने पर 70 रुपए का भाव है।

कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

प्रधानमंत्री पद की दौड़ में चार मुख्य नाम हैं, जिनमें भाजपा के नरेंद्र मोदी सबसे आगे दिख रहे हैं।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते हैं तो 15 पैसे का भाव सट्टाबाजार में चल रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर 35 रुपए का भाव है।

ममता बनर्जी के लिए 60 रुपए और मायावती के लिए 80 रुपए का भाव है। किसी भी अन्य प्रत्याशी के प्रधानमंत्री बनने पर 100 रुपए से अधिक का भाव चल रहा है।

यह पूछने पर कि राजनीतिक पंडितों और बाजार में फैली भाजपा नेता नितिन गडकरी के प्रधानमंत्री बनने की अटकलों को देखते हुए भी सट्टा क्यों नहीं खुला है? एक प्रमुख सटोरिए ने बताया, “नितिन गडकरी बार-बार मीडिया में सफाई दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं इसलिए उनका नाम इस सूची में है, न ही भाव भी खोला है।”

मुंबई की सीटों पर भी लगा सट्टा

मुंबई की सीटों पर भी सट्टा शुरू हो चुका है। सटोरिए बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन हो गया है। उनके बीच मुंबई की कुल 6 सीटों में आधे-आधे का बंटवारा हुआ है।

सटोरिए मान रहे हैं कि भाजपा को अपनी तीनों सीटों पर जीत हासिल करने में कोई समस्या नहीं होगी लेकिन शिवसेना को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

भाजपा के उम्मीदवार गोपाल शेट्टी की जीत तय मानते हुए सटोरियों ने उन पर भाव नहीं खोला है जबकि कांग्रेस की उम्मीदवार उर्मिला मातोंडकर की जीत पर 25 रुपए का भाव चल रहा है।

गजानन कीर्तिकर की जीत पर 50 पैसे तो उनके सामने खड़े कांग्रेस मुंबई के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम की जीत पर दो रुपए का भाव है।

पूनम महाजन की जीत पर 40 पैसे तो प्रिया दत्त की जीत पर 2.25 रुपए का भाव चल रहा है।

कांग्रेस के एकनाथ गायकवाड के सामने शिवसेना के राहुल शेवाले अखाड़े में उतरे हैं। उनके क्रमशः 1.25 रुपए और 70 पैसे के भाव चल रहे हैं।

अरविंद सावंत और कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। उनके बीच समान रूप से 95 पैसे का भाव चल रहा है। अरविंद सावंत शिवसेना के उम्मीदवार हैं। सटोरियों का कहना है कि उनकी हार-जीत में शिवसेना का मोदी और भाजपा विरोधी रुख काम करेगा। मिलिंद देवड़ा युवा हैं और मारवाड़ी समाज से हैं। उन्हें हाई प्रोफाइल बस्तियों के अलावा मुस्लिम समुदाय के वोट भी भारी मात्रा में मिलेंगे। सटोरियों का कहना है कि गुजराती और मारवाड़ी समुदाय इस बार शिवसेना से मुखालफत दिखा सकते हैं। इस सीट का मतदान 19 अप्रैल को होना है। मतदान के साथ ही चार दिनों की लगातार छुट्टियां हो रही है। यह संभावना बहुत हद तक बनती है कि लोग छुट्टियां मनाने मुंबई के बाहर चले जाएं, जिससे मुंबई में मतदान प्रतिशत काफी रहे।

भाजपा नेता किरीट सोमैया का नाम काट कर भाजपा ने इस बार मनोज कोटक को उम्मीदवार बनाया है। उनकी जीत पर 35 पैसे का भाव चल रहा है जबकि विरोधी उम्मीदवार संजय दीना पाटिल के लिए 2.50 रुपए का भाव है।

प्रचंड मतों की जीत वालों के भाव ही नहीं

प्रचंड मतों से जीतने वाले उम्मीदवारों और संसदीय क्षेत्रों पर सट्टेबाजों की निगाह बनी हुई हैं। उनके भाव भी नहीं खोले जा रहे हैं।

वायनाड से राहुल गांधी, गांधीनगर से अमित शाह, वाराणसी से नरेंद्र मोदी, लखनऊ से राजनाथ सिंह, मुंबई से गोपाल शेट्टी, पीलीभीत से वरुण गांधी, नागपुर से नितिन गडकरी की हार-जीत पर भाव नहीं लगा है। बुकी 10 पैसे में आपस में लगा रहे हैं लेकिन खाने का कोई भाव नहीं है।

अमेठी में कांटे की टक्कर

एक बुकी के मुताबिक अमेठी में राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई है। बावजूद इसके हार-जीत में स्मृति ईरानी का नाम ही ऊपर है। बुकियों ने स्मृति ईरानी के नाम पर 80 पैसे का भाव खोला है, तो राहुल गांधी की जीत पर 1.10 रुपए का भाव बता रहे हैं।

राज्यवार स्थिति

बुकियों का कहना है कि गुजरात में कुल 26 संसदीय क्षेत्र हैं, जिसमें 22 भाजपा और 4 इंका जीत सकती है।

मध्यप्रदेश में भाजपा के हाथ 22 सीटी लगेंगी और बाकी कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं।

राजस्थान में भाजपा के पाले में 21, तो कांग्रेस के हिस्से 4 सीटें आने की संभावना जताई जा रही है।

उत्तरप्रदेश में कांटे की टक्कर बताई जा रही है। भाजपा को तकरीबन 22 सीटों का नुकसान बुकियों को दिख रहा है। भाजपा को 48 से 50 सीटें मिलने की संभावना बुकि बता रहे हैं। महागठबंधन को बराबर 15-15 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस को 3 या 4 सीटें ही मिलना बताया जा रहा है।

ईवीएम का भूत चढ़ा सट्टाबाजार पर

सटोरियों के मुताबिक पहले चरण में ईवीएम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी के जीतने की संभावना बढ़ती दिख रही हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही दावा ठोंक चुकी हैं कि भारतीय जनता पार्टी जीतती है, तो सीधा मतलब है ईवीएम में गड़बड़ी की गई है।

शेयर बाजार बनाम सट्टाबाजार

एक सटोरिए का कहना है कि शेयर बाजार में जैसी तेजी दिख रही है, उससे साफ संकेत मिलता है कि एनडीए की सरकार बनेगी। वे शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर भी निगाह रखे हुए हैं। इससे भी सटोरियों को पता चलता है कि मामला किसके पाले में जा रहा है।

72000 वाला कार्ड नहीं चलेगा

बुकियों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की देश के सबसे गरीब परिवारों को सालाना 72,000 रुपए देने की घोषणा का फयादा नहीं हुआ है। इसे वोट हासिल करने का फंडा माना जा रहा है। सट्टाबाजार भी इससे प्रभावित नहीं हुआ है। न्याय योजना से खजाने पर तकरीबन 3.75 लाख करोड़ रुपए का बोझ आएगा। लगभग इतना ही सालाना बजट भारतीय सेनाओं का होता है। कांग्रेस की सरकार बनी तो यह रकम कहां से लाएगी, इस पर लोगों में संदेह बना हुआ है।

बुकियों का मानना है कि राफेल मुद्दा भी फीका पड़ चुका है। भाजपा ने आतंकवाद और राष्ट्रवाद का मुद्दा ऐसे सामने रख दिया है कि उसके पीछे विकास समेत तमाम मुद्दे गायब हो गए हैं। युवा मतदाताओं को सेना और अतिवादी राष्ट्रवाद की बातें करके भाजपा रिझाने की कोशिश कर रही है।

सटोरियों के मुताबिक सारा खेल मतदान कितना होता है, उसी पर निर्भर रहेगा। गर्मी के बीच रमजान के दौरान भूखे-प्यासे मुस्लिम मतदाताओं द्वारा बाहर निकल कर कितनी तादाद में मतदान किया जाता है, वह भी एक बड़ी समस्या हो सकती है।

दलितों को मतदान से रोकने का प्रभाव

सटोरियों का मानना है कि उत्तरप्रदेश में दलितों को पहले चरण में मतदान करने से जिस तरह जबरन रोका गया है, उससे साफ है कि उत्तरप्रदेश में भाजपा किसी भी हाल में अधिक से अधिक सीटें निकालने की कोशिश करेगी। उत्तरप्रदेश में भाजपा की सरकार है। जीत के लिए वह सरकारी मशीनरी तथा पुलिस का दुरुपयोग करने से भी नहीं चूकेगी।

गणित सट्टाबाजार का

पहले चरण के खात्मे तक लगभग 30 हजार करोड़ रुपए तक की रकम लग चुकी है। सटोरियों का मानना है कि चुनाव परिणाम आने तक यह रकम दो लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी।

दबाव में सटोरिए?

एक नामचीन सटोरिए से जब पूछा कि भाजपा के खिलाफ विकास का मुद्दा बाजार में काम कर रहा है। बेरोजगारी व जीएसटी के मुद्दों ने भी कुछ हद तक भाजपा की स्थिति डांवाडोल की है। ब्रांड नरेंद्र मोदी भी कमजोर पड़ा है। इसके बावजूद भाजपा की सरकार बनाने के ही भाव खोले जा रहे हैं, जो सटोरियों पर बाहरी दबाव की तरफ इशारा कर रहा है। जवाब में एक सटोरिए ने कहा कि दबाव पड़ना लाजमी है लेकिन जो सामने दिख रहा है, वही भाव खोले जा रहे हैं। जहां भाजपा को नुकसान है, हम वह भी बता रहे हैं। राजनीतिक दल कितना ही दबाव डालें, पंटरों के बीच विश्वसनीयता खोने का खतरा सट्टाबाजार कभी नहीं उठाएगा।

यह पूछने पर कि सट्टा बाजार में सभी बड़े बुकी गुजराती या मारवाड़ी समाज से हैं। उन पर भाजपा का गहरा प्रभाव दिखाई देता है, क्या सट्टा बाजार पर उनका प्रभाव नहीं दिखाई देगा? सटोरिए ने कहा कि सट्टाबाजार कामकाज पर कोई भी बुकी निजी राय नहीं थोपता है। जिन्हें भी इस बारे में संदेह है, चुनाव परिणाम आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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