CrimeInterviews

आंतरिक सुरक्षा के लिए कई स्तर पर काम करना होगा – यशवर्धन झा आजाद, पूर्व स्पेशल डायरेक्टर, आईबी

1947 में स्वतंत्रता के बाद से भारत आतंकवाद के खतरे का लगातार सामना कर है। एक ऐसी चुनौती जिसने इसकी उदारता और सुरक्षा तंत्र की जम कर परीक्षा ली है। विभाजन काल की हिंसा से घरेलू और बाहरी दोनों मोर्चों पर यह अब तक जारी है। आधुनिक समय के जटिल आतंकवादी नेटवर्क का भारत में बड़े पैमाने पर प्रसार हुआ है। भारत की भू राजनीतिक स्थिति, आंतरिक जातीय, धार्मिक, वैचारिक विभाजन के साथ इस उग्रवाद, अलगाववाद, धार्मिक आतंकवाद सहित विभिन्न प्रकार के आतंकवाद के प्रति बेहद संवेदनशील हो गई है। कुछ दिन पहले दिल्ली में हुए आतंकी हमले से एक बार फिर सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की जा रही है। इसके मद्देनजर पूर्व आईपीएस अधिकारी, आंतरिक खुफिया एजंसी आईबी में स्पेशल डायरेक्टर, केंद्रीय सूचना आयुक्त रहे यशवर्धन झा आजाद से पत्रकार अंकित तिवारी ने विस्तृत बातचीत कर समस्याओं के हल समझने की कोशिश की। मुख्य अंश:

प्रश्न: आपके अनुसार देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां क्या है?

उत्तर: फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है कि नया शिक्षित चरमपंथी वर्ग उभरा है, जिसे हम रेडिकलाइजेशन कहते हैं। अभी जो दो मॉड्यूल पता चले हैं, एक तो गुजरात में है, दूसरा अमोनियम नाइट्रेट से ब्लास्ट प्रकरण हुआ है। इस मॉड्यूल से 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट पकड़ा गया है। एक ब्लास्ट भी लाल किले के पास हुआ है, जिसके तार तीन-चार राज्यों से जुड़े हैं। यह आज सबसे बड़ा खतरा है।

पहले भी आतंकवादी गतिविधियां शिक्षित वर्ग द्वारा संचालित होती रही हैं। ओसामा बिन लादेन उच्च शिक्षित था। अल जवाहरी शिक्षित था। अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर जो विमान टकराए, उसमें एयरोनॉटिकल इंजीनियर्स और पायलट थे, जिनकी ट्रेनिंग जर्मनी में हुई थी।

ऐसे शिक्षित मॉड्यूल भारतवर्ष में जिस तरह सामने आए हैं, मैं समझता हूं, यह आज सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक सुरक्षा के लिए बन चली है।

आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुनौतियों की जहां तक बात है, बहुत सी हैं। उसे कैसे काऊंटर किया जाए, उसके क्या मापदंड होंगे, क्या आयाम होंगे, वह कई स्तर पर करने पड़ेंगे। एक तो हमें अपना इंटेलिजेंस है, उसे थोड़ा बेहतर करने के साथ टेक्नोलॉजी से थोड़ा सा रुख हटा कर ह्यूमन बेस्ड इंटेलिजेंस करना पड़ेगा। यह बड़ा जरूरी है। पहले हमारे पास टेक्नोलॉजी का उतना बैकअप या समर्थन नहीं था, तो हम बराबर ह्यूमन इंटेलिजेंस पर भरोसा करते थे। दूसरा यह है कि समाज के विभिन्न वर्ग को सामने आना पड़ेगा।

यह जो रेडिकलाइजेशन की समस्या है, वह देखनी होगी। अलफलाह विवि में, जो दो डॉक्टर बराबर नूहं जा रहे थे, अमोनियम नाइट्रेट ला रहे थे, दो कमरे 13 और 20 नंबर में उनकी मंत्रणा हो रही थी, उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चला। उनकी काफी मीटिंग, चर्चा, प्लान, प्रोजेक्ट चलता रहा, इस ढाई साल में ना कोई डॉक्टर, ना प्रिंसिपल, ना डीन, ना कोई सुरक्षा कर्मचारी, ना किसी अन्य कर्मचारी, को इसकी भनक लगी। मेरा सवाल है कि यदि उन्हें पता चला तो उन्होंने इसे रिपोर्ट क्यों नहीं किया।

इसका मतलब है कि समाज में आत्मीय रूप से हमसे पहले जुड़े रहते थे, परिवारों से, दोस्तों से, अपने सहकर्मियों से, उनमें एक तरह से दूरी आ गई है। कुछ लोगों ने इसलिए नहीं बोला क्योंकि उन्हें किसी से कोई मतलब नहीं है, कुछ ने इसलिए नहीं बोला कि डर गए होंगे, और कुछ लोग ऐसे थे, जो शांतिपूर्वक उनका समर्थन कर रहे होंगे।

समाज यदि इसके खिलाफ नहीं उठेगा, तो इसका मतलब है कि या तो हमने आतंकवाद को मान लिया है, या घबरा रहे हैं, और उसके खिलाफ लड़ नहीं पा रहे हैं।

इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए हमारे लिए हमें नए सिरे से लोगों को जोड़ना पड़ेगा। कम्युनिटी पुलिसिंग की जो हम बात करते हैं, उसकी सबसे ज्यादा अभी आवश्यकता है।

तीसरी बात यह कि नए बीएनएसएस क्रिमिनल लॉ को फॉरेंसिक सपोर्ट मिला है, इसकी बहुत आवश्यकता थी। 1,900 किलो विस्फोटक नौगांव ले जाने की जरूरत नहीं थी बल्कि किसी फोरेंसिक लैब में उसकी तुरंत सैंपल टेस्टिंग आराम से कर सकते थे।

चौथी आवश्यकता है कि अपने अभियोजन पक्ष को सशक्त करें, ताकि अदालतों में जो केसेस छूट रहे हैं, और अदालतों की जो प्रतिक्रिया आ रही है कि अभियोजन पक्ष ने अच्छी तरह से अपना पक्ष नहीं दिया, उस तरफ देखने की भी बहुत सख्त जरूरत है।

प्रश्न: क्या आपकी नजर में भारत को रक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता है?

उत्तर: देखिए, डिफेंस स्ट्रेटेजी में बहुत सारी चीजें आती हैं। डिफेंस स्ट्रंटेजी की जब बात करते हैं, तो हमारे दो बॉर्डर्स हैं, एक चाइना का है, दूसरा पाकिस्तान। जहां तक पाकिस्तान की बात है, मैं नहीं समझता कि पाकिस्तान हमारे लिए किसी तरह का कंपटीशन है। पाकिस्तान को हमने कई लड़ाइयों में हराया है। यह बहुत अच्छी तरह किया है। ऑपरेशन सिंदूर में शिकस्त दी है। आपने देखा होगा कि सरगोधा समेत उनके खास एयरपोर्ट्स के रनवे हमने ध्वस्त किए। इस लिहाज से पाकिस्तान पर हमारी रणनीति बिल्कुल सही है। मैं कहूंगा कि पाकिस्तान पर ज्यादा बोलने की आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तान छोटा देश है, हमें एक बड़े देश की तरह उनके बारे में बात ही नहीं करना चाहिए।

जहां तक चाइना का सवाल है, मैं समझता हूं कि सरकार की रणनीति ठीक है। डिप्लोमेसी भी हमारे साथ है। सीमाओं पर भी अभी यथास्थिति है। मैं समझता हूं कि उसी को आगे बढ़ाते रहना चाहिए।

जहां तक आंतरिक सुरक्षा का सवाल है, कुछ चीजों में थोड़ा सशक्तिकरण करना है, बाकी जो डिफेंस स्ट्रैटेजी है, ठीक है।

प्रश्न: आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों में भारत की तैयारी कैसी है?

उत्तर: ड्रोन टेक्नोलॉजी में हम आगे बढ़े हैं। जैसे जैसे ड्रोन के खतरे आ रहे हैं, उससे निपटने के तरीके भी निकाले जा रहे हैं। आपने देखा होगा कि ये जो हथियारोँ का जखीरा मिला है, वो ड्रोन के जरिए ही पहुंचा है। पाकिस्तान से ड्रोन वॉरफेयर चलता ही रहता है। सीधे पंजाब कॉरिडोर सेजम्मू तक अनेकों बार उन्होंने ड्रोन से हथियार भेजने की कोशिश की है।

बीएसएफ, आर्मी, ड्रोन वारफेयर में काफी ट्रेंड है। उसके बारे में चर्चाएं भी हो रही है, नए-नए इनोवेशन भी हो रहे हैं। उसके बारे में मैं नहीं समझता कि कोई दिक्कत है।

जहां तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सवाल है, इसे बहुत गंभीर तरीके से लिया है। आपने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में पूछा है, तो बता दूं कि हमारे तमाम कंट्रोल रूम्स हैं, वे स्मार्ट कंट्रोल रूम्स होने चाहिए, उससे ये पता लगे कि जो गाड़ियां आ रही हैं, किसी भी मेट्रो में, दिल्ली में, किसी तरह की एब्नॉर्मल, असाधारण प्रतिक्रिया हो रही है या उनकी चाल में ऐसी गड़बड़ी है, तो तत्काल कंट्रोल रूम पकड़ से। गाड़ी अगर छह घंटे तक आवारा घूम रही है, लावारिस घूम रही है, कुछ शक हो रहा है कि ड्राइवर मास्क पहन रहा है, उतार रहा है, तो यह सब एआई से पता चल सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें आत्मसात करना ही होगा। अब समय आ गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कई चीजें कंट्रोल हो सकती हैं। आपके पास इतना डाटा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उसका मिनटों में एनालिसिस कर देता है। तुरंत उस पर सूचना दे सकता है, ताकि उस पर हम तेजी से कार्रवाई कर सकें। मैं समझता हूं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी को हमने प्राथमिकता दी है, और हम सही दिशा में अग्रसर है।

प्रश्न: भारत को साइबर युद्ध के प्रति क्या रणनीति अपनानी चाहिए ?

उत्तर: आज तो सबसे महत्वपूर्ण हम रणनीति कह रहे हैं, तो वो साइबर वारफेयर है। आपने देखा होगा कि ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट (एम्स) में साइबर वारफेयर के चलते सिस्टम मैनुअल करने पड़े थे। करीब दो-तीन महीने ओपीडी में मैनुअल काम करना पड़ा क्योंकि सारे रिकॉर्ड्स वगैरह पर हमला हुआ था। हमारा डेटा इन्क्रिप्टेड रहता है, उस पर बाहर से हमला करना, उसे हैक करना, सब कुछ चाइना करता है।

ऐसे ही एक साईबर अटैक में हमने देखा कि काफी देर के लिए बिजली चली गई थी। हमारी काफी वेबसाइट्स समय-समय पर हैक होती हैं। बहुत महत्वपूर्ण गवर्नमेंट और अन्य संस्थान के खिलाफ साईबर वारफेयर चलता है। हमारी संस्थाएं और यूनिट्स हर साईबर अटैक का विश्लेषण करते हैं। हमारे पास भी लोग हैं, जो इनके खिलाफ काउंटर वारफेयर करते हैं। ठीक काउंटर टेरोरिज्म की तरह।

ये एक कैट और माउस गेम है कि हम अपनी साइबर वारफेयर की कैपेसिटी बराबर मेनटेन करते रहें। उसमें वृद्धि करते रहे। इस दिशा में कार्रवाई हो रही है। इसके प्रति सभी सुरक्षा एजेंसियां सजग हैं।

प्रश्न: आज भारत की सुरक्षा रणनीति के मुख्य आयाम क्या हैं?

उत्तर: जब हम सुरक्षा रणनीति की बात करते हैं, तो पहली आंतरिक सुरक्षा है। आंतरिक सुरक्षा में बहुत सारी चीजें आती हैं।

आंतरिक सुरक्षा में तो खुशहाली भी एक चीज है कि आपके लोग खुशहाल रहें। ये जो विवाद हो रहे हैं, राजनीतिक विवाद हैं, उनके हम सलूशन निकालें। मणिपुर में कुकी और मैईती समुदायों में समस्या है, तो उसे सुलझाने की कोशिश करें। एक सही राजनीतिक अप्रोच की जरूरत है। सरकार इस बारे में कोशिश कर रही है।

जहां तक कश्मीर का सवाल है, हमारा आंतरिक सुरक्षा सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत है। हां, कभी-कभी चूक हो जाती है। आप यदि निन्यानवे बार सफल होते है, और सौवीं बार थोड़े असफल भी हो जाएं, तो काफी सफलता हासिल की है। मेरे हिसाब से एक चूक है, लेकिन इतनी बहुत बड़ी नहीं कि उस पर हाहाकार मचा दें।

बॉर्डर पर हमारे जितने ऑर्गनाइजेशन है, वे मजबूत हैं, सही कार्रवाई कर रहे हैं।

जहां तक हमारी इंटरनल सिक्योरिटी की बात है, उस पर मैंने इंटेलिजेंस मजबूत करना होगा। इसे टेक्नोलॉजी का ज्यादा सपोर्ट देना पड़ेगा।

आपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात की, उसे भी प्राथमिकता देनी होगी। अपनी साइबर वॉरफेयर स्ट्रेंथ  और बढ़ाना होगा।

जहां तक हमारे हथियारों की बात है, उस पर सरकार काम कर रही है। मैं समझता हूं कि आपकी आंतरिक सुरक्षा मजबूत है, तो आप आर्थिक और सामाजिक रूप से भी बिल्कुल सुऱक्षित हैं। मैं समझता हूं कि इससे सब अच्छा हो सकता है।

….

अंकित तिवारी प्रयागराज के बेबाक पत्रकार हैं। वे इंडिया क्राईम से मानद तौर पर जुड़े हैं।

प्रकाशन तिथी: 26 नवंबर 2025

All Image Courtesy: x.com/yashoazad

….

Leave a Reply

Web Design BangladeshBangladesh Online Market