Books: अंडरवर्ल्ड दाने: मुंबई माफिया के चटपटे चुटीले किस्से
एक किताब जो मुंबई माफिया के कई अनसुने – अनदेखे पहलुओं पर रोशनी डाल रही है। पूरी दुनिया में मुंबई माफिया की पहचान बन चुकी है। इसके सरगना और सिपहसालार नकली करंसी, नशा, हथियार तस्करी से आतंक तक, सब कुछ बेच रहे हैं। दुनिया भर के तमाम देशों में मुंबई माफिया के पांव पसरे हुए हैं। उनकी जड़ों को विश्व माफिया से खाद और पानी मिलता है।
लल्लू जोगी, बखिया बंधुओं, हाजी मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम, अरुण गवली, मन्या सुर्वे, सुभाष ठाकुर, पापामणि, बल्लू बादशाह, जिनाबाई खबरी, रहीम लंबू, माया डोलस, जैसे हजारों किरदार अंधियाले संसार में हैं, जिनकी जिंदगी के अनसुने तथ्य और कथ्य इस किताब में समाहित हैं।
अंडरवर्ल्ड दाने में मुंबई के खूनी संसार और इसके खूंखार सरमायादारों के ऐसे रहस्यमई किस्सें हैं, जिन्हें पढ़ कर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे।
अंडरवर्ल्ड दाने में दहशतगर्द दुनिया के ऐसे किस्से भी हैं, जो आपके चेहरों पर एक अदद मुस्कुराहट भी लाने में सफल होंगे।
अंडरवर्ल्ड दाने में इस खतरनाक खूनी खेल और खिलाड़ियों की ऐसी कहानियां हैं, जो पढ़ कर आप सोच में पड़ जाएंगे कि इसे सच मानें या झूठ।
हैरतअंगेज किस्सों से सजी पुस्तक अंडरवर्ल्ड दाने की लेखन शैली भले ही मनोरंजक मसालेदार सहज एवं जनप्रिय साहित्य की श्रेणी में आती है लेकिन मुंबई के गिरोहों और गिरोहबाजों का जीवंत तथा प्रामाणिक दस्तावेज है।
इन छोटी-छोटी कथाओं की बुनावट किस्सों जैसी है। इन्हें पढ़ते समय आपको अपराध जगत का इतिहास रोचक शैली में मिलेगा। लोगों के स्मृतिकोष कुरेद-कुरेद कर कुछ किस्से निकाले हैं, कुछ दस्तावेजों से पाए हैं, कुछ पत्रकारिता के दौरान समाचार संकलन में हासिल हुए हैं, वे सभी जस के तस रख दिए हैं।

| किस्से (कुल 98) | ||
| मौत का हथौड़ा | खानदानी भाई | वरदा का दरबार |
| शराब कार का पीछा | कलकत्ता से जमानत! | वायसी को सुरक्षा |
| वायसी पर फिल्म और धारावाहिक | गले में फंसी गोली | गणपति के बीच बीट चौकी |
| वरदा का वसूल | दाऊद का तस्करी गुरू | चोर पर मोर |
| खून का बदला खून | मुसाफिरखाना पर कब्जा | मीसा बंदी दाऊद |
| पठानों से पंगा! | सौतेले भाई ने बनाया डॉन | जेल में डॉन की भूख हड़ताल |
| एक मुठभेड़ – तीन कहानियां | विदेशी उपन्यास और बैंक डकैती | मुंबई की पहली मुठभेड़ |
| मुंबई में माफिया – अहमदाबाद में अगड़े | दिलीप कुमार – इकबाल मिर्ची के रिश्ते! | मि. इंडिया से मि. गैंगस्टर |
| दाऊद गुजरात में गिरफ्तार | युसुफ बचकाना उर्फ युसुफ अंसारी | दाऊद के फिंगरप्रिंट! |
| जो हारा, जीने का हकदार नहीं | रमा का गेम | कानूनी पंडित राजन |
| एक थी गीता | सलीम उर्फ एसटीडी उर्फ बाबा उर्फ सलीम रिपोर्टर | सुभाष ठाकुर की तर्ज पर |
| कैसेट कांड | धर्म परिवर्तन की सजा | फजलू-बुदेश गठबंधन |
| डी का प्लान बी | मंजनू, नाना, बब्बी और डी | डी की धाक |
| रवि की नंबरकारी शीला भाभी | एक औरत – तीन दोस्त – एक खंजर | मचमच बना वसूली भाई |
| कारोबार में कंपनी | नूरा की रेशमा | अनीस की मैच फिक्सिंग |
| नाना का खेल | “अब तक 56” की असली कहानी | विभीषण की मौत |
| जज साहब की सांसत | डी-कंपनी बीबीएम पर | शेयर बाजार में सूलेमान |
| रिश्तेदारों की निगरानी | अनीस का बेटा | उपभोक्ता उत्पादों का कारोबार |
| अल कायदा हिट लिस्ट में नाना | दाऊद का कत्था कारोबार | सांसद लाया इकबाल को भारत! |
| हफ्तावसूली = नानखटाई | नौसैनिक पर डी-कंपनी की दबंगई | क्रिश का सट्टा बंद |
| बस्ती के हथियार | खैरनार का ब्लैकआऊट | डकैत या शूटर |
| डंपर चोर खबरी | फुल टाईम – पार्ट टाईम | डी-कंपनी का फर्जी प्यादा |
| सालेम की फिल्म कंपनी | डी-कंपनी का पत्रकार!! | जेल वैन के ठाठ |
| मैं हूं डॉन | दाऊद का पोस्टर! | दाऊद की गिरफ्तारी! |
| दाऊद का अंगरक्षक | डी के पीछे तीन तिलंगे | पहली हत्या – आखिरी मुठभेड़ |
| लापरवाह बंदूकें | एक अधूरा ख्वाब : डी-कंपनी का राजनीतिक दल | दाऊद इब्राहिम कासकर हाजिर हो… |
| बचाओ… ये खा जाएगा… | सलीम अरबी की नावें | लंबू पर सीबीआई का साया? |
| जो पहले गोली चलाए, वो जीते | तंजौर पेंटर से हफ्ता! | छोटे मिंया – बड़ा घपला |
| अरुण गवली का नया ठिकाना | सालेम की सहेली की आत्महत्या | राणा–ठाकुर गठबंधन तिहाड़ में |
| फिल्मी सितारे ने बनाया माफिया सितारा | फजलू-एजाज गठबंधन | एक अधूरा ख्वाब : शकील लंबू का चुनाव लड़ना |
| सालेम को ‘पार्टी’ | दाऊद ने मांगी माफी! | हफ्ते में बीवी! |
| डीके राव की अजानी गर्लफ्रेंड | जेल में लिफाफा | जेल में बिके हथियार |
| जन्मदिन का तोहफा – एक खून | बहनों के नकली नोट |


