Vivek Agrawal Books

व्हाईट नाईट्स : कस्टम्स पर नई किताब का निमंत्रण

प्रिय कस्टम अधिकारियों,

आप कस्टम में काम करते हुए न जाने कितने साहस भरे काम कर गए। न जाने कितने खतरनाक तस्करों और अपराधियों के सिंडिकेट से सीधे भिड़ंत की। न जाने कितने करोड़ का तस्करी से लाया माल अथवा ड्रग्स आपने पकड़ा है। अफसोस कि इनकी दास्तान कभी दुनिया तक नहीं पहुंची। हम ये कहानियां किताब में लाने जा रहे हैं।

हम जानते हैं कि कस्टम की दुनिया बेहद पेचीदगी भरी है। कई बार कामकाज और उससे जुड़ी परेशानियां बाहरी लोग जान नहीं पाते हैं। कस्टम अधिकारियों के भीतरी और बाहरी संघर्ष, उनकी खास अदाएं, धरपकड़ के लिए खुद को तैयार करने के नायाब तरीके, उसकी तकलीफें और उसके पीछे की मेहनत के हैरान करने वाले पक्ष, आपके काम को समझने का मौका इन कहानियों से सारे संसार को मिलेगा।

कस्टम की तुलना देश के किसी विभाग से, किसी भी हालत, में नहीं की जा सकती। एक तरफ जहां देश की आर्थिक रीड़ तोड़ने की कोशिशें कस्टम अधिकारी असफल करते हैं, वहीं युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए तस्करों द्वारा लाए जहरीले नशे को पहले ही रोक कर राष्ट्र और मानवता की सेवा करते हैं। देश के कारोबार और उद्योगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की हर साजिश बेनकाब करते हैं। कस्टम विभाग में काम करना ऐसी साधना है, जिसकी अभिव्‍यक्‍ति किसी माध्‍यम से नहीं की जा सकती।

सवाल है कि अफसर आखिर कैसे तस्करों और व्हाइट कॉलर क्रिमिनल से निपटते हैं!? हर कस्टम अधिकारी की अलग और अनूठी कार्यशाली होती है, और उनके बनाए मामलों में शानदार कहानियां छुपी होती है।

भारतीय कस्टम अधिकारियों और उनके कारनामों की जानकारी बहुत कम मिलती है। कभी-कभार अखबारों में छोटी-मोटी खबरों के अलावा कस्टम के कामों की सराहना नहीं होती है।

अब योजना बनी है कि ऐसी किताब लिखी जाए, जिसमें ये सारे पक्ष सामने आएं कि कैसे कस्टम अफसरान काम करते हैं। उन्होंने कैसे-कोई खास केस हल किया था।

इस किताब से कस्टम्स के नए अधिकारी-कर्मचारी, पाठक, मित्र, साहित्य के जिज्ञासु, शोधार्थी आप‌की मेहनत, कुर्बानियों, देशप्रेम, समर्पण और जद्दोजहद से लाभान्वित होंगे। यह किताब कस्टम्स की भीतरी दुनिया को गहराई तक समझने के लिए संदर्भ पुस्तक का काम करेगी।

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  1. आप बताएं कि जो महत्वपूर्ण केस आपने हल किया, उसकी पहकी सूचना कब, कैसे, कहां और किससे मिली?
  2. उसके बाद आपने क्या किया? सबसे पहले इसके बारे में किसे बताया? यदि किसी आला अफसर से बातचीत हुई, तो क्या हुई? क्या कोई खास निर्देश मिले? क्या कोई खास तैयारी की?
  3. जब आपने छापामारी की, तो आपको किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?
  4. तस्करी से लाया सामान किस तरह तस्करों ने छुपाया था, उसकी तफसील दें।
  5. उसके बाद आपने किस तरह माल बरामद किया? उसकी तब कितनी कीमत थी? उसके बाद जांच कैसे आगे बढ़ी?
  6. कुल कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया?
  7. यदि केस अदालत में गया, तो किस आरोपी को, कितनी सजा मिली?
  8. यदि आपके केस में कोई मुख़बीर था, तो उसका नाम भी बदल कर लिखें। उसे इनफार्मेशन देने के बदले कितना रिवॉर्ड मिला, उसकी जानकारी भी जरूर दीजिए।
  9. जिस केस  के बारे में लिख रहे हैं, क्या उसे न करने या रोकने के लिए किसी तरह का दबाव पड़ा? यदि हां, तो कौन लोग थे? क्या दबाव था?
  10. क्या बाद में तस्करों के सिंडिकेट या गिरोह ने आपको कोई प्रस्ताव दिया या मामला खराब करने के लिए कोई हरकत की, तो उसकी जानकारी भी जरूर लिखिए। उनसे आप कैसे निपटे, वह भी बताएं।
  11. ये केस हल करने के लिए क्या आपको विभाग या सरकार की तरफ से कोई पुरस्कार मिला? उसकी जानकारी सबसे अंत में दीजिए।
  12. अन्य कोई महत्वपूर्ण जानकारी, जो जरूर जानी चाहिए, उसे भी लेख में शामिल करें।

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  1. रचनाएं भेजने की अंतिम तारीख: 31 मार्च 2026
  2. पुस्तक प्रकाशन एवं विमोचन की संभावित तारीख: 30 जून 2026
  3. अधिकतम दो हजार शब्दों का आलेख लिखें।
  4. एक अधिकारी कई लेख दे सकते हैं।
  5. लेख मौलिक हों। कहीं से संदर्भ लिए हैं, तो लेख के अंत में उनका उल्लेख करें।
  6. लेख हिंदी या मराठी में यूनिकोड मंगल फ़ॉन्ट में ही वर्ड फाइल या डॉक्स फाइल फॉर्मेट में ही भेजिए।
  7. आपके लेख यूनीकोड में टंकित की हुई bhashaindia@yahoo.com पर साझा करें। रचनाओं की फोटो या पीडीएफ न भेजें, उनसे काम करना मुश्किल होता हैं।
  8. इन लेखों के साथ अधिकारी की तस्वीर और परिचय प्रकाशित किया जाएगा। 100 शब्दों में परिचय, तस्वीर, ईमेल, फोन नंबर, पता जरूर दें। अपना ईमेल या फोन नंबर जो नहीं छपवाना चाहें, वे इसका उल्लेख नंबर और ईमेल आईडी के आगे कर दें।
  9. लेख में आवश्यक संशोधन करने का अधिकार लेखकों को होगा। हो सकता है कि लेख दोबारा लिखना पड़े ताकि अन्य लेखों से एकसार हो जाएं। लेखकों के पास संपादन का अधिकार होगा। उनका निर्णय बाध्यकारी और अंतिम होगा।
  10. रचनाओं का चयन, लेखकों द्वारा, श्रेष्ठता के आधार पर होगा। इसके लिए ईमेल अथवा फोन पर सूचित किया जाएगा। चयनित रचनाओं की सूचना और प्रकाशन की सूचना लेखक आपसे साझा करेंगे।
  11. जो लेख पुस्तक में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें www.indiacrime.com पर प्रकाशित करेंगे। इसकी पूर्व सूचना दी जाएगी।
  12. ईमेल सब्जेक्ट लाईन में Custom Saga <your artical name> <your name> लिखें तो हमें सुविधा होगी।
  13. केस से संबंधित तस्वीरें हों, तो जेपीईजी या पीएनजी फॉर्मेट में, कम से कम 300 डीपीआई या 1080 मेगापिक्सल में लेख के साथ ही ईमेल से शेयर करें। तस्वीरें लेने वाले छायाकार का नाम भी दें।  किसी अखबार या पत्रिका की हैं, तो उनके नाम का उल्लेख करें क्योंकि कॉपीराइट तस्वीर बिना इजाजत किताब में प्रकाशित करने पर कानूनी परेशानी हो सकती है।
  14. किताब हिंदी और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होगी। इसका ईबुक संस्करण भी प्रकाशित होगा।
  15. किताब के प्रकाशन तक लेख किसी निजी या सामूहिक संकलन में ना दें। 
  16. रचना के साथ कृपया प्रमाण-पत्र भेजें कि रचना किसी संकलन में शामिल नहीं हुई है। यदि संकलन में शामिल है, तो संकलनकर्ता या संपादक और प्रकाशक का अनापत्ति प्रमाण पत्र पीडीएफ में जरूर लगाएं।
  17. पुस्तक का प्रकाशन द इंडिया इंक से होगा।
  18. अपनी स्वीकृति के साथ कहानी हमें अंतिम तिथि तक अवश्य भेज दें।
  19. कोई सुझाव या परामर्श हो तो लेखक से सीधे संपर्क करें।
  20. लेखों के लिए मेहनताना या रायल्टी देने का प्रावधान नहीं है।

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  1. लेख का शीर्षक आकर्षक रखें।
  2. विरामादिविन्यास का सही उपयोग करें। विशेष रूप से ध्यान दें कि आप संवादों के लिए, कॉमा (डैश नहीं) और डबल या दोहरे इनवर्टेड कॉमा का उपयोग करें। आपको कोई वाक्यांश या शब्द वगैरह हाईलाइट करना है, तो सिंगल या इकहरे इनवर्टेड कॉमा का उपयोग करें। अधूरी अभिव्यक्ति को दर्शाने के लिए एलिप्सिस या तीन बिंदियाँ (केवल तीन ही) लगाई जाती हैं, कम या ज़्यादा नहीं।
  3. अस्पष्ट चीज़ों को स्पष्ट करें, बोधगम्यता बनी रहनी चाहिए।
  4. तथ्य, तारीखें, स्थान, नाम की दोबारा जांच कर लें। लेख में उस समय के तथ्य रखें, ताकि वह समय पाठकों के सामने आ जाए।
  5. लेख में मानव मूल्यों, समुदायों, विशेष रूप से स्त्री के प्रति अवमानना न हो।
  6. जातिसूचक नामों, शब्दों का उपयोग न करें।
  7. तथ्यों, तारीखों या बातों को अनावश्यक रूप से न दोहराएं।
  8. लेख में अंग्रेज़ी शब्दों या वाक्यों का जरूरत होने पर इस्तेमाल करें। संभव हो तो अंग्रेजी शब्द का हिंदी / मराठी में कोष्ठक में अर्थ जरूर लिख दीजिए।
  9. अनावश्यक अभिव्यक्तियां न रखें, जो रचना पर बोझ हों।
  10. कृपया मानक वर्तनी का उपयोग करें, जैसे किए, लाए, जाए आदि (किये, लाये, जाये नहीं)। वर्तनी शोधन कर लें, वर्तनी में एकरूपता रखें। हम नुक़्तों के उपयोग को शामिल करेंगे लेकिन इन्हें तभी लगाएं, जब आप इनके उपयोग के बारे में निश्चिंत हों।
  11. लेख में नंबरों को शब्दों में लिखें, ज़रूरत होने पर अंतर्राष्ट्रीय अंकों 1, 2, 3 आदि का इस्तेमाल करें।

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