Vivek Agrawal Books

Books: पुस्तक अंश – बारबंदगी: अध्याय: टेरर बार

मुंबई की बारबालाओं के आपराधिक कारनामों की लंबी फेहरिस्त है। वे अपराधियों को मदद देते भी दिखाई पड़ती हैं। अपने लालच में कब वे इस्तेमाल हो जाती हैं, उन्हें भी पता नहीं चलता। ऐसे ही मुंबई पर हुए आतंकी हमले के पहले मुंबई की छह बारबालाएं भी इस्तेमाल हुईं। क्या है इन बारबालाओं का सच?

26-11 में बारबालाएं

आतंकी गतिविधियों में बारबालाओं का इस्तेमाल भी होता रहा है, उसकी बानगी 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले में देखने को मिलती है।

इन आतंकी हमलों की तैयारी और ठिकाने तय करने के लिए अमेरिका की नशा विरोधी एजंसी (डीईए) के जासूस और पाक आतंकी गिरोह लश्कर-ए-तैयबा के कथित आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने मुंबई में लंबे समय तक कई ठिकानों का सर्वेक्षण किया।

जांच अधिकारियों का दावा है कि हेडली ने मुंबई में आतंकी स्लीपर सेल भी तैयार किए। खुफिया जांच में साबित हुआ है कि इसमें उसने बारबालाओं की मदद ली थी।

वह न केवल फिल्मी दुनिया के लोगों को अमेरिकी धन से फिल्में बनाने का झांसा देकर उनकी मदद हासिल कर रहा था, खूब पार्टियां करता था ताकि लोगों से संपर्क-संबंध बना सके।

हेडली का खुफिया सेलफोन

ताड़देव एसी मार्केट में वीजा एजंसी का दफ्तर हेडली ने तहव्वुर राणा के साथ बनाया था। उसमें काम करने वाली महिला कर्मचारी ने एनआईए को बताया कि हेडली के पास मोबाइल फोन है।

यह मोबाइल वीजा एजंसी के दफ्तर में एनआईए को मिल गया। उसमें हेडली ने काफी नाम और नंबर डाल रखे थे। उससे कई लोगों को फोन भी किए थे। सबको पूछताछ के लिए बुलाया।

ये सेलफोन हेडली ने मध्य 2008 में खरीदा था। इसमें कम से कम तीन सिम कार्ड डलवाए थे। सितंबर 2008 में भी सिम कार्ड बदला। सभी प्रीपेड कार्ड थे। उनसे अंतरराष्ट्रीय फोन भी हुए थे।

इस सेलफोन में जो नंबर मिले, उनमें छह बारबालाएं समेत कई महिलाओं के निकले।

पुलिस ने उन सभी को बुलाया। सबकी कस कर पूछताछ हुई। उनसे पता चला कि हेडली को मोटा बकरा समझ कर वे सभी उसके साथ चल देती थीं। हेडली उन पर अच्छा खर्च भी करता था।

बार-बार सिम कार्ड बदलने से उसके द्वारा खुद को एजंसियों से छुपाने का मकसद तो समझ आता है लेकिन एक ही सेल फोन इस्तेमाल करने से उसकी समझ या इरादों पर संदेह होता है।

प्रशिक्षित आतंकी या एजेंट जानते हैं कि एक ही सेलफोन का इस्तेमाल कितना घातक होता है। उनके आईएमईआई नंबर के जरिए हर नया नंबर भी अपने आप निगरानी में चला जाता है।

सवाल है कि इतना शातिर-खतरनाक आतंकी और अमरीकी एजंसी द्वारा प्रशिक्षित जासूस अपना सेलफोन भारत में क्यों छोड़ गया? क्या इसके पीछे भी कोई रहस्य है?

डांस बारों में उपस्थिति

पुलिस को जांच में पता चला कि मुंबई के तमाम मशहूर बीयर बारों में हेडली ने लगातार उपस्थिति दर्ज करवाई। वह डांस बारों में जाकर ऐसे लोगों की शिनाख्त करता, जो पैसे लेकर उसके लिए मनचाहा काम करने के लिए तैयार रहते।

ग्रांट रोड के टोपाज बार, अंधेरी के मानसी बार, दहिसर के संदेश बार, सहार के मयूरी पार्क बार में हेडली जाना-पहचाना चेहरा था। वह इतनी बार यहां गया कि सब उसे पहचानने लगे। जब हेडली डांस बारों में जाता, उसके साथ विदेशी लोग होते थे।

हेडली इतने खुराफाती दिमाग का स्वामी था कि डांस बारों में जाता तो खुद को अमरिकी कस्टम्स अधिकारी बताता। वह जैसे लोगों से मिलता, उनसे वैसी ही पहचान और काम बताता ताकि अपेक्षित प्रभाव पड़े। हेडली ने कईयों से कहा कि वीजा एजंसी चलाता है।

बारबाला के जरिए फ्लैट

अंधेरी की एक मशहूर बारबाला के जरिए हेडली ने बांद्रा, मुंबई में फ्लैट किराए पर लिया।

हेडली से जुड़ी तीन बारबालाओं के नाम मुंबई पुलिस को पूछताछ में मिले। अधिकारियों के मुताबिक बारबालाओं को पता न था कि जिस विदेशी को ‘धूर’[1] समझ जेब काट रही हैं, वो उन्हें इस्तेमाल कर रहा था। हेडली ने इन लड़कियों को आड़ बना रखा था। बारबालाएं समझती रहीं कि वे चालाक हैं, उसका फायदा वे रही हैं।

हेडली इन लड़कियों को साथ लेकर होटलों तथा अलग-अलग जगह पर घूमने जाने के बहाने रेकी करता रहा। इन लड़कियों की मौजूदगी के कारण उस पर कोई शक भी नहीं करता। हेडली से जुड़ी बारबालाएं मीरा रोड में रहती थीं। सभी पकड़ू या पिकअप बारों में काम करती रही हैं।

एस्कॉर्ट्स गर्ल्स

हेडली ने आतंकी हमले के लिए ठिकानों के चुनाव और रेकी के लिए कुछ एस्कॉर्ट एजंसियों की लड़कियों का भी इस्तेमाल किया। जांच में पता चला कि उसने हम तुम 2009, इंजॉय, फन क्लब 2009, स्टार 2009, इंटरनेशनल फ्रेंडशिप क्लब 2008, फ्रेंडशिप, गॉर्जियसक्लबऑफइंडिया.कॉम, नाइट क्लब 2009 से भी लड़कियां बुलाई थीं।

एस्कॉर्ट एजंसियों के फोन नंबर हेडली ने अखबारों के विज्ञापनों से लिए थे। वह रुसी या कॉकेशियन लड़कियां बुलाता था। उन्हें साथ रख कर वह खुद को विदेशी दिखाता था। वह एक बार बांद्रा के प्रॉपर्टी डीलर सनी सिंह से मिला, तो एस्कॉर्ट एजंसी की एक लड़की को अपनी पत्नी के रूप में मिलाया।

हेडली ब्रिज कैंडी के मोक्ष जिम में हमेशा जाता था। यहीं लोगों से उसने संपर्क-संबंध बनाए थे। हेडली 2006 से 2009 के बीच नौ बार भारत आया। हर बार अमेरिका से भारत आया लेकिन गया पाकिस्तान था।

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[1] बकरा, कमाई का साधन

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